लेकिन पेच यह है कि सरकार को फिर हिमाचल में लगाए जाने वाले प्रोजेक्टों के लिए जमीन एक्वायर करने के लिए इतनी राशि देनी पडे़गी। इसके चलते सरकार इस पर क्या करे क्या न करे की स्थिति में है। हिमाचल में शिमला-धर्मशाला, पठानकोट-मंडी, जालंधर-मंडी और परवाणू-शिमला फोरलेन का काम चल रहा है।
इसमें लोगों की जमीनें एक्वायर की गई हैं। अभी लोगों को फैक्टर वन के तहत ही राशि मुहैया कराई जा रही है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के सचिव मदन लाल शर्मा का कहना है कि लोगों को जमीन एक्वायर करने के बाद पैसा नहीं दिया जा रहा है।
मकान तोड़े गए, रास्ते और पेयजल स्रोतों को तबाह कर दिया गया। जरूरत से ज्यादा लोगों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया। उन्होंने जयराम सरकार से चार गुणा मुआवजा देने के प्रस्ताव पर मुहर लगाने की मांग की है।