14वें वित्तायोग के तहत हिमाचल को मिल रही करोड़ों की राशि के मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार खैरात में हिमाचल को पैसा नहीं दे रही है। जो भी पैसा दिया है, उसे पंचायतों के विकास कार्यों पर खर्चा जा रहा है। पहले जारी राशि खर्च करने का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट देना होता है, उसके बाद ही अगले विकास कार्यों को पैसा दिया जाता है।
दरअसल, भाजपा विधायक रविंद्र रवि ने अपने प्रश्न में कहा कि 14वें वित्तायोग के तहत केंद्र सरकार करोड़ों रुपये दे रही है, लेकिन सरकार की ओर से गाइडलाइन जारी होने से पंचायतों में यह राशि खर्च नहीं हो पा रही है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि खर्चे का ब्योरा देने के बाद ही पंचायतों को दूसरी किस्त जारी की जाती है।
पैसा देने में केंद्र सरकार अहसान नहीं कर रही है। पंचायतों में पैसा खर्च करने का हर सरकार का अपना तरीका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों का गठन होने के बाद एक साल ट्रेनिंग पीरियड के चलते ये पैसा समय पर खर्च नहीं हो पाया, लेकिन अब ये समस्या खत्म हो गई है, क्योंकि ट्रेनिंग का काम पूरा कर लिया गया है।
कहा कि प्रदेश कि पंचायतों को वर्ष 2015-16 से 2020 तक 1809.80 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी। इससे पूर्व मूल सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान 14वें वितायोग से 15 फरवरी 2017 तक 57 करोड़ 39 लाख से अधिक की राशि हिमाचल को मिली है, जिसे खर्च कर लिया गया है।
विरोध के बीच एक सप्ताह पहले बजट सत्र स्थगित
हिमाचल विधानसभा का बजट सत्र विरोध के बीच निर्धारित समय से एक सप्ताह पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्ष ने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए सदन में हंगामा और नारेबाजी की, लेकिन सत्तापक्ष ने सत्र के स्थगन का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित करा दिया। सत्तापक्ष ने समय पूर्व सत्र के स्थगन का कारण अधिकांश एजेंडे पूरे होना बताया।
हालांकि, असल कारण राजनीतिक दलों को भोरंज उपचुनाव में प्रचार के लिए समय नहीं मिल पाना माना जा रहा है। शुक्रवार को सदन की निर्धारित कार्यवाही पूरा होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि एक से चार अप्रैल तक छुट्टियां हैं। एजेंडा बहुत कम बचा है। विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति चाहते हैं कि सदन की बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाए।
इस पर विपक्ष ने विरोध करते हुए कहा कि अभी तो सत्र चल रहा है। भाजपा विधायक रविंद्र रवि ने कहा कि ऐसा करना सही नहीं है। सात अप्रैल तक सत्र निर्धारित हुआ था। भाजपा विधायक दल इसका विरोध करता है। उन्होंने कहा कि कई तरह के प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई है। अभी कई कार्य लंबित हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से सीएम के खिलाफ याचिका खारिज होने के बाद तो नहीं ऐसा किया जा रहा है? इस पर स्पीकर ने कहा कि सदन को चलाना, नहीं चलाना सदन का अधिकार है। न्यायालय के निर्णय का इससे कोई ताल्लुक नहीं है। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि हाउस वोटिंग से चलता है। इसके लिए मतदान किया जाए। विपक्ष ने विरोध के बीच नारेबाजी शुरू की और सत्ता पक्ष ने ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर दिया।
पूछे नहीं जा सके 405 सवाल
बारहवीं विधानसभा के 14वें सत्र में कुल 17 बैठकें ही हो पाईं। कुल 405 सवाल पूछे ही नहीं जा सके। 1006 सवालों में से 422 तारांकित और 179 अतारांकित प्रश्न ही पूछे गए। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत 62 विषय उठे। पांच सरकारी विधेयकों को पारित किया गया। नियम 324 में सात विषयों पर जवाब दिए गए। विधानसभा की समितियोें के 26 प्रतिवेदनों को हाउस में रखा गया।
साक्षात्कार खत्म करने का फैसला देरी से लिया: धूमल
नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के इंटरव्यू खत्म करने का फैसला सरकार को पहले लेना चाहिए था। सरकार ने चुनावी वर्ष में यह फैसला लिया है, अब इसे इंप्लीमेंट कोई और ही करेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने जानबूझ कर बजट सत्र को समय से पहले खत्म किया है।
विपक्ष ने नियम 117 और 130 के तहत जनता के मुद्दों पर विधानसभा में चर्चा करनी थी लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया। अब भाजपा भोरंज उपचुनाव और विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाएगी। धूमल ने प्रेसवार्ता में कहा कि यह पहले से ही सोची समझी साजिश थी। इस निर्णय से लोकतंत्र की हत्या ही नहीं बल्कि विधायकों के अधिकारों का भी हनन हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ये कदम अपने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने और सदन में होने वाली अपनी फजीहत से बचने के लिए उठाया है। धूमल ने कहा कि बीते रोज दोनों पक्षों के बीच इस मामले पर चर्चा हुई। इसमें सदन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 7 अप्रैल तक चलने का फैसला हुआ।
उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष पूरी अवधि तक सत्र चलाने पर सहमत थे लेकिन आज अचानक संसदीय कार्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सत्र की समाप्ति का प्रस्ताव सदन में पेश कर दिया। सदन की गरिमा और सदस्यों के अधिकारों की सुरक्षा का जिम्मा विधानसभा अध्यक्ष का होता है। अध्यक्ष को कह कर सत्र समाप्त करवाना अलोकतांत्रिक कदम है।
संपर्क में कांग्रेस के कई विधायक
धूमल ने कहा कि कांग्रेस के कई विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। अगर इन विधायकों को पार्टी में शामिल किया जाता है तो गुण-दोष के आधार पर टिकट दिया जएगा। एक सवाल पर धूमल ने कहा कि बाबा रामदेव और उनके लोगों को बेवजह परेशान करने वाले अधिकारियों और लोगों के खिलाफ सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।
शराब के धंधे में भ्रष्टाचार
धूमल ने कहा कि शराब के धंधे में हिमाचल में सबसे बड़ा घोटाला हो रहा है। उन्होंने आबकारी नीति में रातोंरात परिवर्तन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिवरेज कॉरपोरेशन बनाने के सरकार के एक गलत निर्णय से प्रदेश में हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं, क्योंकि बहुत से जिलों में एक भी शराब की दुकान नहीं बिकी है। उन्होंने कहा कि जो कॉरपोरेशन थोक में भी शराब की सप्लाई नहीं कर सकती, वह परचून में शराब कैसे बेचेगी।
वीरभद्र को कुर्सी पर बैठने का अधिकार नहीं: सत्ती
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से आय से अधिक संपत्ति के मामले में एफआईआर रद्द करने की मांग को खारिज करने से साफ है कि उन्होंने इस्पात मंत्री रहते अपने पद का दुरुपयोग किया और आय से अधिक संपत्ति को अर्जित किया।
सत्ती ने कहा कि हिमाचल हाईकोर्ट का वह निर्णय जिसमें वीरभद्र सिंह को गिरफ्तार करने से पूर्व कोर्ट की अनुमति आवश्यक होगी, वह आदेश भी दिल्ली हाईकोर्ट ने निरस्त किया है। इसलिए वीरभद्र सिंह को एक पल भी अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे रहने का कोई अधिकार नहीं है। कहा कि भाजपा पहले से ही वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को विभिन्न
स्तरों पर उठाती रही है और पार्टी ने वीरभद्र सिंह और उनके सहयोगी मंत्रियों, विधायकों, अध्यक्षों, उपाध्यक्षों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों को राज्यपाल को चार्जशीट के रूप में सौंपा है। पार्टी इन दिनों माफि या हटाओ, हिमाचल बचाओ
अभियान के तहत प्रदेश के अंदर जन जागरण का अभियान चलाए है, जिससे यह पता चल सके कि प्रदेश की पूरी कांग्रेस पार्टी की सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है और प्रदेश में सरकार न होकर माफियाराज सत्ता में काबिज है।