मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने वाले नहीं बख्शे जाएंगे। चाहे वे अपनी पार्टी के हों या किसी और के। उन्होंने तंज कसा - ऐसे चुनिंदा लोगों की शक्लें मेरे दिमाग में घूम रही हैं, अगर मेरे हत्थे चढ़े तो याद रखेंगे। प्रदेश और पार्टी की राह में कोई रुकावट बना तो उसे खुदा भी नहीं बचा सकता। वह शुक्रवार कंडाघाट में जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
जनसभा शाम को देर से शुरू होने पर सीएम ने आयोजन कर्ताओं को भविष्य में संध्या के समय जनसभाएं न करने की नसीहत दी और बीच में संबोधन रोक दिया। कहा कि जनसभाएं शाम को होने से लोगों को परेशानी होती है। दूर से आए लोगों को ठंड के बीच घर पहुंचने में दिक्कत न हो, इसके लिए वे बीच में ही जनसभा समाप्त करते हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रदेश के वर्तमान राजनीतिक हालात पर उन्हें बहुत कुछ बोलना था। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स और खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश चौहान उनके साथ रहे। शुक्रवार को सीएम ने 37 करोड़ की विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण तथा शिलान्यास किए।
हर खुजली की दवा मेरे पास, पर ईर्ष्या की नहीं
जनसभा के दौरान सीएम मजाकिया अंदाज में पार्टी के भीतर और बाहर वालों पर तंज कसते दिखे। मंच पर उठी लोकल पॉलिटिक्स, भाजपा और भितरघातियों की बातों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग विकास पचा नहीं सकते। उनको न जाने क्या खुजली होती है, लेकिन कोई भी फिक्र न करे, हर खुजली की दवा मेरे पास है। बस एक का इलाज मेरे पास नहीं है। वह है ईर्ष्या और दुर्भावना।
कुछ को मनोवैज्ञानिक चिकित्सक की जरूरत
सीएम ने कहा कि तरक्की का रुझान हर तरफ से होना चाहिए। समाज में कुछ लोग अच्छे हैं तो कुछ बुरे। अच्छों को तुम देख लो। बुरों को मेरे पास भेज दो। उन्हें मनोवैज्ञानिक तरीके से देखना मुझे भली-भांति आता है। अपने राजनीतिक सफर में उन्होंने प्रदेश में विकास की हर तरफ बयार बहाई है।
जनसभा से गायब बाली, सीएम के काफिले से नदारद
परिवहन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री जीएस बाली जनसभा से दूर रहे। सुबह मुख्यमंत्री सोलन दौरे पर पहुंचे, लेकिन बाली सीएम के काफिले का हिस्सा नहीं बने। वे अपने विभाग से संबंधित पॉलिटेक्निक कॉलेज छात्रावास के शुभारंभ के बाद गायब हो गए।
आलम यह था कि पूजा के समय पहले तो सीएम और मंत्रियों के साथ परिवहन मंत्री को बैठने तक का स्थान नहीं दिया। कुछ देर खड़ा रहने के बाद किसी की नजर गई तो उन्हें दरी पर बैठाया गया।