मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का कहना है कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश में दिखी मोदी लहर हिमाचल प्रदेश की मजबूत कांग्रेस के आगे नहीं ठहरेगी। अपने लंबे सियासी अनुभव के सहारे वो टीम मोदी को अपने होम ग्राउंड में चित करने का दावा कर रहे हैं।
संगठन-सरकार के बीच मतभेद होने से बने संशय को न केवल खारिज किया बल्कि चेताया भी कि पार्टी में मतभेद रखने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अमर उजाला के विशेष संवाददाता अरुणेश पठानिया से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिवर्तन रैली के बाद पैदा सियासी हालात पर बातचीत की।
प्रश्न - मोदी लहर से आप आगामी विधानसभा चुनाव में कैसे निपटेंगे?
सीएम - उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली से जिस हवा की बात भाजपा कर रही है, वो हिमाचल के बाहर ही रुक गई है। प्रदेश में कांग्रेस की मजबूत टीम के सामने मोदी लहर नहीं चलेगी। हिमाचल विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए आसान नहीं रहेगा।
प्रश्न - आप हिमाचल में मोदी लहर मानते हैँ?
सीएम - उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड की परिस्थितियां हिमाचल से अलग हैं। संगठन वहां एकजुट नहीं दिखा, जिससे कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा है।
प्रश्न - उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार के हार के क्या कारण रहे?
सीएम - उत्तराखंड की राजनीतिक परिस्थितियां भिन्न हैं। वहां के मुख्यमंत्री हरीश रावत बेहद सुलझे हुए राजनेता हैं, लेकिन संगठन में बिखराव के चलते वहां भाजपा को जीत मिली। संगठन और सरकार में तालमेल नहीं होना और बड़े पैमाने पर पार्टी में टूट का खामियाजा भुगतना पड़ा।
प्रश्न - हिमाचल में भी तो प्रदेश संगठन और सरकार के बीच गहरे मतभेद है?
सीएम - ऐसा नहीं है। कांग्रेस में नेतृत्व और स्थिरता जैसा कोई मुद्दा नहीं है। आलाकमान को मौजूदा स्टेट लीडरशिप पर भरोसा है। हां, पर एक बात जरूर है कि चुनाव के दौरान कांग्रेस किसी भी मतभेद वाले को बर्दाश्त नहीं करेगी। इसको लेकर मैं बेहद गंभीर हूं। संगठन एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा।
प्रश्न - चुनाव को लेकर आपकी क्या रणनीति रहेगी?
सीएम - सरकार ने प्रदेश के हर वर्ग और क्षेत्र के लिए काम किया है। विकास को आधार बनाकर ही पार्टी चुनाव में उतरेगी और उसी आधार पर वोट मांगेंगे।