सुक्खू ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों को समझना होगा कि लोकतंत्र में असहमति कोई अपराध नहीं होती और न ही विरोध करने वाले नागरिक दुश्मन होते हैं। विद्यार्थियों के हाथों में पेन, कॉपी और किताबें अच्छी लगती हैं, हथकड़ियां नहीं। देश के युवाओं को भय और दमन का माहौल देने के बजाय उनके सपनों और अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि भाजपा शासित राज्य छात्र समुदाय को विरोधी के रूप में न देखें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की आवाज को दबाने की कोशिश देश के भविष्य के साथ अन्याय है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती संवाद, सहमति और असहमति के सम्मान में निहित है। इसलिए सरकारों को छात्रों और युवाओं की चिंताओं को सुनकर समाधान निकालने की दिशा में काम करना चाहिए, न कि दमनात्मक उपायों का सहारा लेना चाहिए।