मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भविष्य में अनुभवी कोविड स्टाफ की जरूरत पड़ने पर सेवाएं ली जाएंगी। कोरोना काल में रखे कर्मचारियों को नौकरी में वरीयता दी जाएगी। मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी विभागों में जितने भी कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है, वह नियमों के तहत होती है। कोरोनाकाल में जो नियुक्तियां हुईं थीं, उसके लिए कोई नियम नहीं बने थे। पूर्व सरकार ने अगर नियम बनाए होते तो हम उन्हें नहीं हटाते। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके सरकार ने मानवीय आधार पर इन्हें कई बार सेवा विस्तार दिया। उन्होंने कहा कि इनका मानदेय भी जारी किया गया है और इनकी 3.50 करोड़ रुपये की देनदारी लंबित है। इसे भी जल्द जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के विधायक इस मामले पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।
भाजपा विधायक राकेश जम्बाल ने मामला उठाते हुए कहा कि कोरोना काल के दौरान विकट परिस्थितियों में सेवाएं देने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकार ने नौकरी से हटा दिया है। उन्होंने कहा कि महामारी के समय भर्ती करने के लिए नियम बनाने का समय नहीं था। 14 माह की कांग्रेस सरकार ने नियम भी नहीं बनाए। उन्होंने इन कर्मचारियों की सेवाएं जारी रखने की मांग की। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि यह सदन की गरिमा का सवाल है कि सरकार आश्वासन देती है और होता कुछ नहीं है। कोरोना काल में रखे गए कर्मचारियों ने जान जोखिम में डालकर दूसरों का जीवन बचाया। जयराम ठाकुर ने कहा कि इन कर्मचारियों की सेवाएं किसी अन्य स्थान पर ली जानी चाहिए।