उन्होंने पेंशनरों से कहा कि मुझे चार माह का समय दें, आपको बुलाकर आपसे वार्ता करूंगा और सारी बात सुनूंगा। कहा कि 2016 से आपकी जो मांगें हैं, सभी को पूरा किया जाएगा। प्रदेश की आर्थिक स्थिति सुधारने को लिए गए कठोर फैसले भविष्य की नींव है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील है। राज्य को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए कई कठिन फैसले लिए हैं, जिनका लाभ धीरे-धीरे दिखेगा। मुख्यमंत्री ने इस दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र की योजनाओं के कारण राज्य पर भारी बोझ पड़ा है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में राज्य को अपने 10 प्रतिशत हिस्से से कहीं अधिक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक राज्य पर 175.25 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है, जिसने प्रदेश की वित्तीय चुनौतियों को बढ़ाया है। 16वें वित्त आयोग का हवाला देकर मुख्यमंत्री ने यह भी संदेश दिया कि अगर भुगतान में देरी हो रही है, तो उसके पीछे केंद्र की योजनाओं का अतिरिक्त बोझ और प्रदेश सरकार को विरासत में मिली आर्थिक स्थिति जिम्मेदार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नड्डा पूछते हैं कि लोगों को घर बनाने के लिए पैसे मिले या नहीं, जबकि सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार की ओर से सिर्फ डेढ़ लाख ही मिलते हैं, जबकि कांग्रेस सरकार ने इसे बढ़ाकर सात लाख रुपये किया है। कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद हिमाचल को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। बद्दी में देश की करीब 35 प्रतिशत दवाइयों का निर्माण होता है, लेकिन जीएसटी से पहले जहां 4000 करोड़ रुपये का राजस्व आता था, आज वह महज 150 करोड़ रुपये रह गया है। कहा कि भाजपा खुद आपसी गुटबाजी का शिकार है। जयराम ठाकुर, बिंदल और नड्डा अलग-अलग आंकड़े पेश कर रहे हैं, जिससे जनता में भ्रम पैदा हो रहा है। स्मार्ट सिटी परियोजना पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला जैसी ऐतिहासिक नगरी को स्मार्ट सिटी के नाम पर लोहे के पिंजरे में बदल दिया गया है।