हिमाचल में बेरोजगारी दर सबसे कम
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार हिमाचल प्रदेश के लिए श्रम बल भागीदारी दर सभी आयु वर्ग के लिए 61.3 प्रतिशत रही। यह उत्तराखंड (42.5), पंजाब (42.3), हरियाणा (36.3) और अखिल भारतीय (42.4 ) स्तर से अधिक है। 2022-23 में प्रदेश के लिए सभी आयु वर्ग के लिए श्रमिक जनसंख्या अनुपात 58.6 प्रतिशत रहा, जोकि उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और अखिल भारतीय अनुपात से बेहतर है। प्रदेश में 54.8 प्रतिशत महिलाएं पड़ोसी राज्यों व अखिल भारतीय स्तर की तुलना में आर्थिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। पड़ोसी राज्यों में सभी उम्र के व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति के अंतर्गत बेरोजगारी से पता चलता है कि हिमाचल में बेरोजगारी दर सबसे कम 4.4 प्रतिशत है, जबकि उत्तराखंड में 4.5 प्रतिशत, पंजाब और हरियाणा में यह 6.1 प्रतिशत रही।
4.67 लाख लोग गरीबी से उभरे
हिमाचल प्रदेश में बहुआयामी गरीबी दर 2013-14 में 10.14 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 3.88 प्रतिशत हो गई और इस अवधि के दौरान लगभग 4.67 लाख लोग गरीबी से उभरे हैं। राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) पर हाल ही में जारी रिपोर्ट राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (2015-16) और 5 (2019-21) पर आधारित है।
चालू वित्तीय वर्ष के दौरान हिमाचल प्रदेश में मुद्रास्फीति की दर मध्यम
मुद्रास्फीति वित्तीय वर्ष 2022-23 के अप्रैल से दिसंबर तक राज्य स्तर पर थोक मूल्य मुद्रास्फीति 11.6 प्रतिशत से गिरकर -1.1 प्रतिशत हो गई। उपभोक्ता मूल्य संबंधित सूचकांकों में उतार-चढ़ाव 1.9 से 5.1 प्रतिशत के बीच रहा। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान हिमाचल प्रदेश में मुद्रास्फीति की दर मध्यम रही है। दिसंबर 2023 (अनंतिम) में संयुक्त उपभोक्ता मूल्य संचकांक 5.1 प्रतिशत है और यह आरबीआई की सहनशीलता सीमा के भीतर है।
विनिर्माण क्षेत्र में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद
उद्योग क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और हिमाचल में रोजगार की अनेक संभावनाएं पैदा करने के लिए महत्वपूर्ण है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के अग्रिम अनुमान के अनुसार उद्योग क्षेत्र (खनन और उत्खनन सहित) 82,658 करोड़ अनुमानित है। सकल राज्य मूल्य वर्धित में उद्योग क्षेत्र का योगदान 2023-24 में 42.80 प्रतिशत है, जिसमें 29.25 प्रतिशत विनिर्माण क्षेत्र, 7.44 प्रतिशत निर्माण, 5.76 प्रतिशत बिजली, जल आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाएं, खनन और उत्खनन से 0.36 प्रतिशत से आ रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान विनिर्माण क्षेत्र में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है जो उद्योग क्षेत्र में दूसरी सबसे ऊंची वृद्धि दर है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान निर्माण क्षेत्र में उच्चतम यद्धि दर का अनुमान है, जोकि 120 प्रतिशत है।
सकल राज्य मूल्य वर्धन में कृषि और संबद्ध क्षेत्र का योगदान 49 प्रतिशत बढ़ा
सर्वेक्षण के अनुसार सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में कृषि और संबद्ध क्षेत्र का योगदान 2018-19 में 17,767 करोड़ से 49 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 26,458 करोड़ हो गया है। 2018-19 से 2023-24 के बीच वर्तमान कीमतों पर फसलों के जीएसवीए में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 2018-19 में 10,286 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 16,410 करोड़ हो गया। कृषि और संबद्ध गतिविधियों के अंतर्गत पशुधन पालन एक महत्वपूर्ण उपक्षेत्र है। यह वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धित में 1.31 प्रतिशत और कृषि और संबद्ध क्षेत्र के जीएसवीए में 9.6 प्रतिशत योगदान देता है।
सेवा क्षेत्र 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान
प्रदेश में लिए सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 2018-19 में 42.02 प्रतिशत और 2020-21 में 42.07 प्रतिशत थी। जो 2023-24 में बढ़कर 43.50 प्रतिशत रही। कुछ उपक्षेत्रों में कोविड-19 महामारी के बाद मजबूत सुधार देखा गया। व्यापार, मरम्मत, होटल और रेस्तरां की हिस्सेदारी जो 2020-21 में 6.2 प्रतिशत थी, 2023-24 में बढ़कर 7.0 प्रतिशत हो गई है। अनुमान के अनुसार 2023-24 में सेवा क्षेत्र 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।
पर्यटन और ऊर्जा
पर्यटकों का आगमन क्रिसी विशेष गंतव्य में पर्यटन की मांग के मुख्य संकेतकों में से एक है। कोविड-19 महामारी के बाद घरेलू पर्यटकों का आगमन साल 2020 में 32.13 लाख से बढ़कर 2021 में 56.37 लाख, 2022 में 151 लाख और 2023 में पूर्ण रूप से 160.05 हो गया है। इससे पता चलता है कि, पर्यटकों का आगमन महामारी से पहले के स्तर पर पहुंच रहा है। वहीं, राज्य में कई जलविद्युत परियोजनाएं हैं। जो इसकी नदियों की ऊर्जा का उपयोग करती है और क्षेत्र की बिजली आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देती है। प्रदेश में बड़ी संख्या में जलविद्युत्त संसाधन है, जो राष्ट्रीय क्षमता का लगभग 25 प्रतिशत है। पांच बारहमासी नदी घाटियों पर विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण से राज्य में लगभग 24,000 मेगावॉट जलविद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है। राज्य की कुल जलविद्युत क्षमता में से अब तक 11209 मेगावाट का दोहन किया जा चुका है, जिसमें से केवल 7.6 प्रतिशत हिमाचल सरकार के नियंत्रण में है। प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र बिजली का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। इसके बाद घरेलू खपत 23.45 प्रतिशत है। सरकारी सिंचाई एवं जलापूर्ति योजनाएं कुल खपत का 6.36 प्रतिशत है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 के अग्रिम अनुमान के अनुसार द्वितीयक क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धित वित्तीय वर्ष 2022-23 के 58,039 करोड़ के मुकाबले 63,424 करोड़ होने का अनुमान है। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज होने का अनुमान है। द्वितीयक क्षेत्र में मोटे तौर पर विनिर्माण (संगठित और गैर-संगठित), बिजली, गैस और जल आपूर्ति और निर्माण शामिल हैं। राज्य सकल मूल्य वर्धन में सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी है। सेवा क्षेत्र में व्यापार, होटल और रेस्तरां अन्य साधनों और भंडारण द्वारा परिवहन, रेलवे, संचार और बैंकिंग और बीमा, रियल एस्टेट, आवास और व्यावसायिक सेवाओं का स्वामित्व, लोक प्रशासन और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। अनुमानों के अनुसार सेवा क्षेत्र के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए 54,253 करोड़ होने का अनुमान है, जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह 50,520 करोड़ था। यह पिछले वर्ष की तुलना में 74 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है।