मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हल्दी खरीद के लिए जारी किया पंजीकरण प्रपत्र।
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हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती से उगाई जाने वाली हल्दी अब हिमाचल हल्दी के ब्रांड नेम से बाजार में बिकेगी। सोमवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के किसानों से हल्दी की खरीद के लिए पंजीकरण फार्म जारी करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों को प्राकृतिक खेती पद्धति से हल्दी उगाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक पद्धति से उगाई गई हल्दी 90 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का प्रावधान किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी प्रदान करते हुए किसानों की आर्थिकी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को इसके लिए किसानों के पंजीकरण और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। कहा कि पंजीकृत किसानों से खरीदी गई कच्ची हल्दी का स्पाइस पार्क हमीरपुर में प्रसंस्करण किया जाएगा। यह पहली बार है कि सरकार किसानों से सीधे तौर पर कच्ची हल्दी खरीदेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्राकृतिक पद्धति से उगाए गेहूं को 60 रुपये प्रतिकिलो और मक्की को 40 रुपये प्रतिकिलो के समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीद रही है। सरकार ने दूध के समर्थन मूल्य में 21 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। गाय का दूध 51 रुपये और भैंस का दूध 61 रुपये प्रति लीटर के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है।
हर साल 24,995 मीट्रिक टन हल्दी का उत्पाद
प्रदेश में 2,042.5 हेक्टेयर क्षेत्र में हल्दी की खेती की जा रही है। इससे प्रतिवर्ष लगभग 24,995 मीट्रिक टन हल्दी उत्पादन हो रहा है। हल्दी उत्पादन में प्रदेश में मुख्य रूप से हमीरपुर, कांगड़ा, बिलासपुर, सिरमौर, मंडी और सोलन जिला अग्रणी हैं। हल्दी के औषधीय महत्व को देखते हुए कोविड-19 के बाद घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग बढ़ी है और यह किसानों की आजीविका का प्रमुख विकल्प बन गई है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, विधायक विनोद सुल्तानपुरी, वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची और सचिव कृषि विभाग सी. पालरासू मौजूद रहे।