कर्मचारी का बेटा हूं, मां को आती है पिता की पेंशन, घर जाता हूं तो जेब में डाल देतीं हैं 500 का नोट
बिलासपुर के एक दिवसीय दौरे पर आए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू और कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल रायजादा ने भावनात्मक कार्ड चला। एक तरफ जहां सीएम ने अपने पिता के पूर्व कर्मचारी होने और माता को मिलने वाली पेंशन का जिक्र कर कर्मचारी, पेंशनर वर्ग को साधने की कोशिश की। वहीं, सतपाल रायजादा ने पूर्व सैनिक का बेटा होने का एलान गर्व के साथ किया। सीएम ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मेरे परिवार से कोई राजनीति में नहीं था, कर्मचारी का बेटा हूं। जब हमने राजनीतिक सीढ़ियां चढ़नी शुरू की उस समय यह कहा जाता था कि कहीं सरकारी नौकरी लग जाए तो उचित है, घर का पालन पोषण अच्छी तरह से हो जाएगा।
राजनीति में तो पता नहीं भूखे मरने की भी नौबत आ जाएगी। उन्होंने कहा सीएम बनने के बाद सबसे पहली कैबिनेट में पुरानी पेंशन की बहाली की। मैं भी कर्मचारी का बेटा हूं। पिता की पेंशन आज भी मेरी मां को आती है और वो सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। मां किसी पर निर्भर नहीं हैं। मैं भले ही सीएम बन गया हूं, लेकिन जब भी मां के पास जाता हूं तो वह 500 का नोट निकालकर मुझे देती हैं। इससे सुखद कुछ नहीं है। वहीं, रायजादा ने कहा कि वह पूर्व सैनिक के बेटे हैं। इस बात का गर्व है। जब पहला चुनाव लड़ा था तो मां ने अपनी पेंशन के पैसे मुझे दिए थे। आज भाजपा युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।