हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य के लिए 15 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन का कोटा निर्धारित किया है। सरकार ने इसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत मीट्रिक टन करने का केंद्र से आग्रह किया है। प्रदेश सरकार की पहली प्राथमिकता स्वास्थ्य चिकित्सा के उद्देश्य से ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है। यह बात शुक्रवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिमला से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के ऑक्सीजन उत्पादकों को संबोधित करते हुए कही।
सीएम ने कहा कि कोरोना वायरस का प्रभाव कम करने के लिए समाज में एक-दूसरे की सहायता करना सबका दायित्व है। राज्य में ऑक्सीजन का उत्पादन सरप्लस है, लेकिन इसके परिवहन के लिए सिलिंडरों की आवश्यकता है। राज्य में स्थित सभी ऑक्सीजन संयंत्रों को सरकार बिजली की पर्याप्त और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। कहा कि ऑक्सीजन उत्पादकों को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में इसकी आपूर्ति निर्बाध और सुचारु रूप से सुनिश्चित करनी चाहिए। सरकार निजी ऑक्सीजन उत्पादकों के विभिन्न मुद्दों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और उन्हें समय पर भुगतान सुनिश्चित करेगी।
आईजीएमसी के ऑक्सीजन प्लांट की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आईजीएमसी के ऑक्सीजन प्लांट की उत्पादन क्षमता को 20 मीट्रिक टन तक बढ़ाएगी। इससे राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में सुनिश्चित होगी। राज्य में अन्य ऑक्सीजन प्लांटों की उत्पादन क्षमता भी बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। सरकार ने केंद्र से राज्य को डी-टाइप के 5000 और बी-टाइप के 3000 सिलिंडर उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है।
ऑक्सीजन संयंत्रों के मालिकों ने साझा किए विचार
अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग राम सुभग सिंह ने कहा कि विभाग ऑक्सीजन प्लांट की उचित कार्यशीलता सुनिश्चित करने के लिए ऑक्सीजन उत्पादकों को लॉजिस्टिक की हरसंभव सहायता देगा। प्रदेश में स्थापित ऑक्सीजन संयंत्रों के मालिकों सुधांशु कपूर, सुरेश शर्मा, पुष्पेंद्र मित्तल, विशांत गर्ग, अजय मोदी, रोहित मित्तल, हर्ष गुप्ता और रवि धीमान ने भी विचार रखे। आयुक्त उद्योग हंसराज शर्मा, विशेष सचिव अरिंदम चौधरी मुख्यमंत्री के साथ, जबकि मंडी, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर और ऊना के उपायुक्त बैठक में शामिल हुए।