इस प्रकार निगम को वीरवार को कुल 23.63 एमएलडी पानी प्राप्त हुआ है। इसका वितरण जारी समय-सारिणी के अनुसार क्षेत्रवार कृष्णानगर, रामबाजार, लोअर बाजार, जाखू, बैनमोर, इंजनघर, संजौली चौक, ढली, मशोबरा, भट्टाकुफर,
शांति विहार, मलयाणा और सांगटी में किया गया। मांग के अनुसार अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक शौचालयों में भी टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित बनाई गई।
बैठक में आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह, मुख्य सचिव विनीत चौधरी, सचिव आईपीएच देवेश कुमार, शिमला के उपायुक्त अमित कश्यप, नगर निगम शिमला के आयुक्त रोहित जम्वाल, निदेशक सूचना एवं
जन सम्पर्क विभाग अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक ओमापति जम्वाल सहित सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम इंजीनियर सहित वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया कि शुक्रवार को पानी का वितरण कसुम्पटी, पंथाघाटी, छोटा शिमला, विकास नगर, पटियोग, कंगनाधार, न्यू शिमला, खलीनी और संबंधित वार्डों के साथ लगते निगम के बाहरी क्षेत्रों में करेंगे।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि शिमला शहर को पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इसे तीन अंचलों में बांटा गया है और प्रत्येक अंचल में अलग-अलग दिनों की जा रही पानी की आपूर्ति की समय-सारिणी एक दिन जारी की जा रही है ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और वे अपनी समय सारिणी के अनुसार पानी प्राप्त कर सके।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने वीरवार को कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री के शिमला शहर में पानी की कमी को लेकर दिए बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अधिकतर समय कांग्रेस की सरकार सत्तासीन रही है।
कांग्रेस सरकार में मुकेश अग्निहोत्री स्वयं वरिष्ठ मंत्री रहे हैं, उन्होंने कभी भी शिमला शहर के लिए पानी की कोई योजना बनाने की पहल नहीं की, जिसका खामियाजा आज शिमला शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
यही नहीं, शिमला नगर निगम पर भी कांग्रेस ही अधिकांश समय तक काबिज रही है और उन्होंने भी कुछ नहीं किया। परमार ने कहा कि यदि कांग्रेस की सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान बहुत पहले शिमला शहर में होने वाली पानी की कमी की आशंका के चलते कोई परियोजना बनाई होती तो आज समस्या
इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार शिमला शहर के लिए कभी कोल डैम तो कभी सतलुज अथवा पब्बर नदियों से पानी लाने का लॉलीपॉप दिखाती रही, लेकिन कभी भी इस पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया।