सुजानपुर के कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा समेत कई विधायकों के अनुपूरक सवालों पर स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार का जवाब आने के बावजूद मुख्यमंत्री ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। सीएम ने कहा कि इस मामले में सबको सहयोग देने की आवश्यकता है।
पूर्व सरकार ने अंधाधुंध संस्थान खोले। पीछे मुड़कर नहीं देखा। ऐसे में हमारे पास दो ही विकल्प बचते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने दोनों विकल्पों पर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा। जयराम ने कहा- आप पदों का सृजन या संस्थान खोलकर चले गए।
फट्टा लगाकर चले गए। शिक्षा और स्वास्थ्य दो ऐसे विषय हैं, जिनका हर व्यक्ति से संबंध है। सरकार रिक्तियों को भर रही है। यही कारण है कि डेढ़ महीने के कार्यकाल में ही सरकार ने डॉक्टरों के 200 पदों को भर लिया है। उन्होंने विधायकों को कहा- आप प्राथमिकता दीजिए।
अनुबंध कर्मियों को नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता लाभ देने का विधानसभा चुनावों के दौरान किया गया वादा भाजपा ने सरकार बनाते ही भुला दिया है।
जयराम सरकार ने सोमवार को विधानसभा में चिंतपूर्णी से विधायक बलवीर सिंह के सवाल पर लिखित जवाब में बताया है कि अनुबंध काल की सेवा को वरिष्ठता में जोड़े जाने का कोई प्रावधान नहीं है। इस तरह का कोई मामला सरकार के विचाराधीन नहीं है।
उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, पार्टी के कई पदाधिकारियों व नेताओं ने अनुबंध कर्मियों की वरिष्ठता की मांग को हल करने का आश्वासन दिया था।
हिमाचल अनुबंध अध्यापक संघ के पूर्व महासचिव राजेश वर्मा ने कहा कि प्रदेश के तमाम अनुबंध कर्मियों ने वरिष्ठता के वादे पर इस बार भाजपा को वोट दिया।
अनुबंध कर्मी इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से लेकर तमाम मंत्रियों से मिले लेकिन सरकार ने अभी तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं की।
हिमाचल अनुबंध अध्यापक संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश जयसिंहपुरिया ने सरकार से चुनावों में अनुबंध काल की वरिष्ठता देने के वादे को जल्द पूरा करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी अनुबंध काल की वरिष्ठता देने की दिशा में कई फैसले अनुबंध कर्मियों के हक में दे चुका है। ऐसे में सरकार को भी जल्द फैसला लेना चाहिए।
प्रश्नकाल के शुरू होने से पहले ही मंगलवार को विधानसभा परिसर में प्रतिनिधिमंडलों की नारेबाजी पर विपक्ष ने हंगामा किया। विपक्षी पार्टी कांग्रेस के विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि विधानसभा परिसर में प्रतिनिधिमंडल आकर नारेबाजी कर रहे हैं और विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने भी इनके सामने भाषण देने शुरू कर दिए हैं। ऐसा करना सही नहीं है। कांग्रेस ने सरकार से इस पर चर्चा मांगी। इस पर विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कहा कि यह नहीं हो सकता है। उन्होंने प्रश्नकाल की घोषणा कर दी।
कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी की ओर से मामला उठाए जाने के बाद संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि वे सदस्य को बताना चाहते हैं कि इस विषय को अध्यक्ष के चैंबर में जाकर ही उठाया जा सकता है।
हाउस की बात को हाउस में नहीं उठाया जाता है। इस पर कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री को यह मालूम होना चाहिए कि हमने ये लिखकर दिया है। विधानसभा परिसर में पार्टियों के झंडे लाए जा रहे हैं। ढोल-नगाड़े बजाए जा रहे हैं। इस बारे में वे सरकार से जवाब चाहते हैं।
इस बीच हंगामा हुआ तो स्पीकर बिंदल दोनों ओर से हंगामा करते विधायकों को बैठाने की अपील करते रहे। उन्होंने कहा कि इस पर किसी भी तरह की चर्चा को मंजूर नहीं किया जा सकता है। इस विषय को पिछले दिन भी उठाया जा चुका है। हालांकि, स्पीकर के हस्तक्षेप पर इसके बाद प्रश्नकाल शुरू हो गया।
जब सदन में कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने प्रश्नकाल के दौरान ये मामला उठाया तो उस वक्त मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सदन में नहीं थे। बाद में जब सीएम जयराम ठाकुर सदन में आए तो स्वास्थ्य विभाग में रिक्तियों पर पूछे गए सवाल का जवाब देने के बाद उन्होंने इस विषय पर भी बात की।
जयराम ठाकुर ने कहा कि विधानसभा परिसर में किसी ने जय श्रीराम का नारा लगाया। उन्होंने कहा कि वे प्रत्यक्ष गवाह हैं कि कांग्रेस शासनकाल में भी परिसर में नारे लगते रहे और नाटियां डलती रहीं। धर्मशाला में हुए सत्र में भी ऐसा हुआ। हमारे पास इसके वीडियो हैं। नेताओं को कंधे पर लाया जाता था। उस समय भी कांग्रेसी पार्टी के पटके डालकर अंदर आते थे।
इस पर भी सोचे जाने की जरूरत है। ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई यहां मिलने आए ही नहीं। लोग दरअसल गली में खडे़ होते हैं। लंबी कतारें लगी रहती है। इसीलिए उनसे बाहर मिलने जाते हैं। सरकार लोगों की ही है। इसलिए लोगों से मिलना होता है। यहां मिलने के लिए स्थान नहीं है। सचिवालय में भी लोग ऐसे ही मिलते हैं।
यहां की भौगोलिकता ही ऐसी है। बीते दिन जो लोग आए उनके पास झंडे नहीं थे। अगर इससे विधायको को असुविधा हुई तो इसका अफ सोस है। जयराम ठाकुर ने कांग्रेस विधायकों से पूछा - आप ही बताएं, लोगों से कहां मिलें? इसमें सहयोग करें। इस पर भी विपक्ष हंगामा करता रहा तो स्पीकर बिंदल ने कहा - इस पर सीएम अपनी स्थिति साफ कर चुके हैं। अगर किसी को असुविधा हुई हो लिए खेद भी जता चुके हैं।
सीएम जयराम ठाकुर के हस्तक्षेप पर कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष कह रहे हैं कि इस पर चर्चा नहीं होगी और सीएम इस पर चर्चा कर रहे हैं। ये ठीक नहीं है। ये सरकार है कि मछली मार्के ट है। इस सदन की अपनी गरिमा और मर्यादा है। सदन के बाहर ढोल-नगाड़े बज रहे हैं। प्रदर्शन हो रहे हैं। ये सदन की सुरक्षा का भी सवाल है।