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पुलिस साइंस कांग्रेस में सीएम जयराम ने इस विषय पर जताई चिंता

Fri, 23 Mar 2018 12:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश के पर्यटन स्थलों और युवाओं को नशे से बचाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों को जब्त करने से ही काम नहीं बनेगा बल्कि इसकी खेती को नष्ट करना भी जरूरी है। भांग, अफीम की अवैध फसलों को नष्ट करना रणनीति का मुख्य हिस्सा होना चाहिए।

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मुख्यमंत्री वीरवार को हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा बीपीआरएंडी के सहयोग से पीटरहॉफ में आयोजित 46वीं ऑल इंडिया पुलिस साइंस कांग्रेस के पहले दिन संबोधित कर रहे थे। सीएम ने कहा कि गुड़िया कांड से सीख लेते हुए भविष्य में ऐसी घटना न होने देना जरूरी है। इसी क्रम में सरकार महिलाओं, बेटियों के लिए गुड़िया हेल्पलाइन और शक्ति बटन ऐप की शुरुआत की है।

इससे पहले कार्यक्रम में डीजीपी सीताराम मरडी ने पुलिस साइंस कांग्रेस के बारे में विस्तार से बताया। बीपीआरएंडी के डीजी डॉ. एपी महेश्वरी ने मुख्यमंत्री व डीजीपी का धन्यवाद किया।
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मुख्यमंत्री ने विभिन्न जांच व पुलिस सहायता उपकरणों पर लगाई गई प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। समारोह में विधि मंत्री सुरेश भारद्वाज के अलावा एडीजी सीआईडी अशोक तिवारी, एडीजी कानून व्यवस्था अनुराग गर्ग के अलावा विभिन्न प्रदेशों व एजेंसियों से आए पुलिस अधिकारी शामिल थे।

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आधुनिक तकनीक पर सीख की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्रभावी कानून एवं व्यवस्था बनाने के लिए राज्य सरकार आधुनिक तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग करने का प्रयास कर रही है।

कार्यप्रणाली में तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करने और पुलिस की कार्यशैली को और बेहतर बनाने के लिए लीक से हटकर सोच को विकसित करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके कई सकारात्मक पहलू है लेकिन कुछ नकारात्मक पहलू भी मौजूद हैं।

हमें इन्हीं नकारात्मक पहलुओं को रोककर सकारात्मक तरीके से इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए। कहा कि यह पुलिस और जनता के बीच खाई को पाटने में बहुत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
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अंग्रेजों के जमाने के एक्ट की जल्द जगह लेगा नया पुलिस एक्ट

परंपरागत तरीके से काम करने वाली पुलिस की कार्यशैली में बदलाव के लिए अब तकनीकी, कानूनी व प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं व विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। बीपीआरएंडी के महानिदेशक डा एके महेश्वरी ने यह जानकारी मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान दी। महेश्वरी ने कहा कि पुलिस आज भी उन्हीं परंपरागत तरीकों से काम कर रही है जबकि अपराध और अपराधी आधुनिक होते चले गए।

ऐसे में समय के साथ कानूनी व तकनीकी बदलावों से पुलिस को रूबरू कराने के लिए एक फोरम तैयार किया जा रहा है जहां देशभर के विश्वविद्यालयों के साथ टाई अप किया जाएगा। इसके बाद वहां के शोध छात्रों को केंद्र से लेकर थाने तक की पुलिस की कार्यशैली पर शोध करने की मंजूरी दी जाएगी। इससे न सिर्फ उन शोध छात्रों के ज्ञान से पुलिसकर्मी अपग्रेड होंगे बल्कि शोध की बदौलत पुलिस की कमियों और ताकत का भी सही आंकलन हो सकेगा।

इससे पुलिस की कार्यशैली में समय की मांग के अनुसार बदलाव के लिए प्रयास किए जा सकेंगे। महेश्वरी ने कहा कि आजादी के बाद से आज तक देश में वही अंग्रेजों के जमाने का पुलिस एक्ट लागू है जो समय के हिसाब से काफी पीछे है। कहा कि नया पुलिस एक्ट तैयार किया जा रहा है जिसे जल्द ही गृह मंत्रालय के जरिये संसद से मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाएगा। 
 
ताकि पुलिस को काम करने में और आसानी हो। वहीं, बताया कि आम लोगों से सीधे संवाद के लिए भी एक फोरम बनाया जा रहा है। इसकी मदद से लोगों के सुझाव व शिकायतों को जानने का प्रयास किया जाएगा ताकि पुलिस से लोगों को क्या अपेक्षा है और पुलिस को किस तरह काम करना चाहिए इसको समझा जा सके।
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