ऐसे हालात में किसानों ने भारी-भरकम कर्ज लेकर पाली हाउस बना दिए, लेकिन उन्हें इसमें उस तरह की सफलता नहीं मिली, जैसी अपेक्षित थी। लाल, पीली शिमला मिर्च और अन्य तमाम व्यावसायिक सब्जियों को उगाने के बावजूद वे उस हिसाब से मुनाफा नहीं कमा पाए। 1264 किसान कर्ज ही नहीं चुका पाए।
इनमें से सैंकड़ों किसान तो बैंकों के डिफाल्टर ही बन गए। इन्हीं किसानों ने मुख्यमंत्री से कर्ज माफी करने या वन टाइम सेटलमेंट की गुहार लगाई है। वर्तमान में पाली हाउस बनाने पर 80 से 85 फीसदी तब सब्सिडी दी जा रही है।
सब्सिडी जिस लागत पर दी जाती है, वह भी बढ़ा दी गई है। ऐसे में सरकार आज के सब्सिडी अनुपात के हिसाब से भी किसानों को राहत दे सकती है। अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री डा. श्रीकांत बाल्दी ने इस विषय पर 31 जुलाई को बैठक तय किए जाने की पुष्टि की है।