मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि यह पैरामीटर एक कमेटी तय करती है कि किस व्यक्ति को किस तरह की सुरक्षा दी जानी है। इसे राजनीतिक निर्णय के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए। सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा उनकी हत्या से एक-दो दिन पहले ही वापस ली गई थी। यह राजनीतिक निर्णय ही था। यह निर्णय गलत था। एके 47 से तीस से चालीस राउंड गोलियों के चले। सुरक्षा किसे कितनी मिलनी चाहिए, यह देखा जाना चाहिए। मीडिया में खबरें बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है, यह उचित नहीं है।
जो सरकार हाल ही में वहां बनी है, वह ऊंची बातें कर रही है। इसे समझने की जरूरत है। पंजाब में खालिस्तानी झंडा लगाने वालों को हमने पांच दिन में पकड़ लिया। पंजाब में लगातार झंडे लग रहे हैं। वहां की सरकार इस बारे में कार्रवाई क्यों नहीं करना चाह रही है। प्रधानमंत्री की रैली का समय याद आता है। जब देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा को वहां पर हल्के में लिया जाता है। पंजाब में भ्रष्टाचार के मामले में दो महीने के अंतराल में एक मंत्री को बर्खास्त करना पड़ता है।