इसके लिए 877.25 करोड़ रुपये का प्रावधान है। हिमाचल में लगभग 62 प्रतिशत जनसंख्या को सीधे तौर पर कृषि क्षेत्र से रोजगार प्राप्त है। ऊर्जा क्षेत्र के लिए 711.06 करोड़ रुपये, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के लिए 457.48 करोड़ रुपये और सामान्य आर्थिक सेवाओं के लिए 335.15 करोड़ रुपये जबकि सामान्य सेवा क्षेत्र के लिए 133.89 करोड़ रुपये प्रस्तावित है। ग्रामीण विकास के लिए 133.65 करोड़ रुपये, उद्योग और खनिज के लिए 95.59 करोड़ रुपये, विज्ञान प्रौद्योगिकी और पर्यावरण के लिए 38.02 करोड़ रुपये और विशेष क्षेत्र कार्यक्रम के तहत 27.78 करोड़ रुपये प्रस्तावित है।
1788.49 करोड़ रुपये अनुसूचित जाति उपयोजना को
1788.49 करोड़ रुपये अनुसूचित जाति उपयोजना, 639 करोड़ रुपये की राशि जनजातीय क्षेत्र उपयोजना और 80 करोड़ रुपये की राशि पिछड़ा क्षेत्र उपयोजना में रखी गई है। 1217.82 करोड़ रुपये की बाह्य सहायता प्राप्त योजनाए, नाबार्ड के तहत 427 करोड़ रुपये सड़कों एवं पुलों के लिए, 143 करोड़ रुपये ग्रामीण जलापूर्ति, 125 करोड़ रुपये छोटी सिंचाई योजनाओं, 40 करोड़ रुपये मृदा संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण को प्रस्तावित हैं।
पांच मंत्री भी रहे बैठक में मौजूद
राज्य योजना बोर्ड की बैठक में उपाध्यक्ष रमेश धवाला, मंत्री महेंद्र सिंह, सुरेश भारद्वाज, अनिल शर्मा, डॉ. राम लाल मारकंडा और गोविंद सिंह ठाकुर भी मौजूद रहे। मुख्य सचिव बीके अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त अनिल खाची और बोर्ड के अन्य सदस्यों के अलावा कई अधिकारी भी मौजूद रहे।