भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा है कि देश की अदालतों में बढ़ती जजों की कमी राष्ट्रीय चुनौती बन गई है। जजों की कमी के चलते अदालतों में काम प्रभावित हो रहा है। इसको लेकर केंद्र सरकार से बातचीत चल रही है।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश ने शुक्रवार को राजधानी शिमला से सटे घंडल गांव में लॉ यूनिविर्सिटी का शिलान्यास और हिमाचल प्रदेश ज्यूडिशियल एकेडमी के हॉस्टल ब्लाक का लोकार्पण किया।
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CHIEF JUSTICE OF INDIA
इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जजों की कमी से जहां देश की कई अदालतें जूझ रही हैं वहीं हिमाचल प्रदेश इस मामले में खुशनसीब है। हिमाचल में जजों के कुल 13 पद स्वीकृत हैं और यहां 11 जजों की नियुक्ति हो चुकी है।
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प्रदेश में सिर्फ दो जजों के पद रिक्त हैं। वहीं उनके गृह प्रदेश जम्मू-कश्मीर में जजों के कुल 17 स्वीकृत पदों में से आठ पदों पर नियुक्ति हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जजों की कमी के कारण अदालतों में दायर मामलों की संख्या बढ़ती है।
टीएस ठाकुर ने बढ़ती साक्षरता दर और संपन्नता को अदालतों में मामलों की संख्या बढ़ने के लिए जिम्मेवार ठहराया। कहा, जहां लोग अधिक पढ़े-लिखे होते हैं और आर्थिक तौर पर संपन्न होते हैं।
वहां की अदालतों में अधिक केस दायर होते हैं। केरल में भी केस अधिक दायर होने का यही कारण है। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि देश की अदालतों में लंबित 80 प्रतिशत केस उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश में है।
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उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट में लंबित केस जल्द निपटाने के लिए प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और अन्य जजों को बधाई दी। कहा, हिमाचल हाईकोर्ट सहित अन्य अधीनस्थ अदालतों ने लंबित केस निपटाने में अन्य राज्यों की अपेक्षा मुस्तैदी दिखाई है। न्यायिक प्रणाली के लिए यह शुभ संकेत है।