केंद्र सरकार की ओर से 44 श्रम कानूनों को खत्म कर केवल चार श्रम संहिताओं में बदलने के खिलाफ दो अगस्त को मजदूर संगठन सीटू पूरे प्रदेश में प्रदर्शन करेगी। इस दौरान सभी जिला और खंड मुख्यालयों में केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला जाएगा।
सीटू ने केंद्र सरकार पर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है। सीटू राज्य महासचिव प्रेम गौतम और राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि केंद्र की भाजपा सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है।
यह सरकार पूंजीपतियों की मुनाफाखोरी को बढ़ाने के लिए साल 1923 से अंग्रेजों के जमाने से लेकर आज तक मजदूरों के कल्याण के लिए बने 44 श्रम कानूनों को खत्म करने की साजिश रच रही है। यह सरकार इन 44 श्रम कानूनों को खत्म कर मजदूरों के लिए केवल 4 श्रम संहिताएं बनाना चाहती है।
इस दिशा में इसने कार्य शुरू कर चार प्रस्तावित श्रम संहिताओं में से दो को संसद में पेश भी कर दिया है। सीटू पदाधिकारियों का कहना है कि संसद में पेश की गईं दो श्रम संहिताएं वेतन संबंधी श्रम संहिता और व्यावसायिक स्वास्थ्य, सुरक्षा व कामकाजी स्थिति है।
केंद्र सरकार का यह कदम तानाशाहीपूर्ण है और स्वतंत्र भारत के इतिहास में काला अध्याय है। इन श्रम संहिताओं से पूंजीपतियों के हाथ मजबूत होंगे और मजदूरों का शोषण बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों को श्रम संहिताओं में बदलने से श्रम कानूनों का दायरा मजदूरों में बढ़ने के बजाए घट जाएगा और कुल श्रम शक्ति का 73 प्रतिशत हिस्सा श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएगा।