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शिमला का ताज है यह क्राइस्ट चर्च

Fri, 02 May 2014 03:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
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हिल्स क्वीन शिमला के रिज मैदान पर स्थित ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च को राजधानी का ताज कहा जाता है। यह उतरी भारत में दूसरा सबसे पुराना चर्च है जिसकी खूबसूरती आज भी लोगों को लुभाती है।
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अंग्रेजी शासनकाल में बना यह चर्च आज भी शिमला की शान बना हुआ है। वर्ष 1857 में नियो गोथिक कला में बना यह चर्च एंग्लीकेन ब्रिटिशन कम्युनिटी के लिए बनाया गया था जिसे उस समय सिमला कहते थे।

यह चर्च काफी किलोमीटर दूर से एक ताज की तरह दिखाई देता है। क्राइस्ट चर्च को कर्नल जेटी बोयलियो ने 1844 में डिजाइन किया था। इसका निर्माण करीब 13 साल बाद 1857 में शुरू किया गया।
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इसके उपर लगी बड़ी घटी 1860 में कर्नल डमबेल्टन ने दान की थी। चर्च पर लगा पोर्च 1873 में जोड़ा गया। इसके बाद भले की इसकी घड़ी नहीं चल पाई लेकिन यह चर्च दशकों से अपनी पहचान बरकरार रखने में कामयाब हुआ है।

ये भी है खासियत

चर्च में पांच बड़ी खिड़कियां लगी है जो कीमती कांच से बनाई गई हैं। ये खिड़कियां ईसाई धर्म के विश्वास, उम्मीद, परोपकार, धैर्य, विनम्रता का प्रतीक है।

यह चर्च हर रविवार को खुला रहता है। हर साल देश विदेश से शिमला आने वाले लाखों सैलानी इस चर्च में जाना नहीं भूलते हैं। यहां आने वाले सैलानी चर्च के सामने फोटो भी खिंचवाते हैं।
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प्रशासन ने भी इस ऐतिहासिक इमारत को बचाने में काफी प्रयास किया है। इसकी कलाकृति के साथ छेड़छाड़ न हो, इसके पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
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