चिंतपूर्णी के दरबार में भक्तों की ओर से मां के चरणों में अर्पित किए गए चढ़ावे से काला धन सफेद करने की कोशिश का मामला सामने आने के बाद सरकार ने मंदिर अधिकारी और सहायक मंदिर अधिकारी को प्रारंभिक जांच के बाद पद से हटा दिया है। संबंधित अधिकारियों को जांच होने तक उनके गृह विभागों में तैनाती दी गई है।
भाषा एवं संस्कृति विभाग की प्रदेश सचिव अनुराधा ठाकुर ने बताया कि मंदिर अधिकारी सुभाष चौहान को राजस्व विभाग, जबकि सहायक मंदिर अधिकारी श्रेष्ठा ठाकुर को भाषा विभाग में वापस भेजा गया है। मामले की जांच जारी है। गौर हो कि अमर उजाला ने 12 नवंबर को यह मामला उजागर किया था।
इसके बाद उपायुक्त विकास लाबरू ने दोनों अधिकारियों को गणना कक्षा से हटाकर एसडीएम अंब को प्रारंभिक जांच सौंपी थी। मंदिर में कथित तौर पर एक हजार और पांच सौ के नोटों के बदले छोटी करेंसी बदलने की कोशिश की गई, लेकिन मंदिर के ही एक कर्मचारी के विरोध जताने पर यह नाकाम हो गई।
इस घटनाक्रम का ऑडियो भी अमर उजाला ने सार्वजनिक किया। इसमें एक बैंक कर्मी, मंदिर कर्मचारी और मंदिर अधिकारियों की बातचीत रिकॉर्ड बताई जा रही है। पुख्ता सूत्रों के मुताबिक मंदिर के चढ़ावे के पैसों से 9 नवंबर को पुरानी करेंसी बदली गई, जबकि 10 नवंबर को 1 लाख 31 हजार रुपये बदलने की कोशिश की गई थी। सूत्र बताते हैं कि मंदिर में 11 नवंबर को भी नोटों की अदला-बदली की गई।
ऐसे हुआ मामले का पटाक्षेप
करेंसी बदलने के लिए अधिकारियों ने चढ़ावे की नई डिटेल बनवाई, लेकिन मंदिर के ही एक कर्मचारी के विरोध से बात सिरे नहीं चढ़ी। कर्मी ने इसकी मोबाइल पर रिकार्डिंग की। मामले को लेकर मंदिर के उक्त कर्मचारी तथा संबंधित अधिकारी के बीच काफी नोंक-झोंक भी हुई। बात न मानने पर कर्मचारी के साथ गालीगलौज भी किया गया।
ऐसे होती है चढ़ावे की गणना
मंदिर में चढ़ावे के पैसे की गणना मंदिर के गणना कक्ष में मंदिर की ओर से निर्धारित एक कमेटी के सामने होती है। इसमें एक रुपये के सिक्के से लेकर हर नोट की अलग डिटेल बनाई जाती है। इसके बाद उसे बैंक में सुपुर्द किया जाता है। एक बार जो डिटेल तैयार हो गई, उसे बाद में बदला नहीं जा सकता।