यह जमीन वे अधिकारी या कर्मचारी खरीद सकते हैं जो हिमाचल में 30 साल से अधिक समय से रह रहे हों और संबंधित स्थानीय निकाय ने इसे इजाजत देने की सिफारिश की हो।
इन्हीं नियमों में संशोधन करने की मांग बड़ी संख्या में गैर हिमाचली कर्मचारियोें ने की। उन्होंने अपने बच्चों के लिए भी यह छूट मांगी। राज्य सरकार के कुछ शीर्ष अधिकारियों ने इस नियम को संशोधित कर गैर हिमाचलियों के बच्चों को जमीन खरीदने की छूट दे दी।
इसका हिमाचल की विभिन्न संस्थाओं और संगठनों ने सोशल मीडिया पर जमकर विरोध किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप पर इस आदेश को वापस ले लिया है। इससे गैर हिमाचली अधिकारियों और कर्मचारियों को एक तरह से झटका लगा है।
राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है कि इस संशोधन को फिलहाल रोक दिया गया है। केवल गैर हिमाचली अधिकारी और कर्मचारी ही 30 साल की सेवा के बाद घर बनाने के लिए तय 500 वर्ग मीटर से कम जमीन खरीदने के हकदार रहेंगे।
उन्होंने मांग की कि अगर किन्हीं कारणवश वे खुद घर के लिए जमीन खरीदने की स्थिति में न हों तो उस स्थिति में उनके बच्चों को इसकी छूट दी जाए। राज्य सरकार के कुछ शीर्ष अधिकारियों ने इस नियम को संशोधित करने की मुहिम शुरू की।
यह लगभग तय कर लिया गया कि 30 साल से अधिक समय कार्यरत गैर हिमाचली अधिकारियों और कर्मचारियों के बच्चों को जमीन खरीदने के लिए आवेदन करने की छूट दे दी जाए, मगर इस पर हिमाचल प्रदेश की कई संस्थाओं और संगठनों ने सोशल मीडिया पर हाय-तौबा मचा लिया और धारा 118 में छेड़छाड़ तक की बात की। हालांकि ये मामला धारा 118 में छेड़छाड़ के बजाय भू सुधार नियम में संशोधन का था।
इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गंभीर मंत्रणा के बाद पूरे मामले मेें हस्तक्षेप करते हुए यह तय किया है कि फिलहाल इस मुहिम को विराम दे दिया जाए। इससे गैर हिमाचली अधिकारियों और कर्मचारियों को एक तरह से झटका लगा है। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है कि इस संशोधन को फिलहाल रोक दिया गया है। केवल गैर हिमाचली अधिकारी और कर्मचारी ही 30 साल की सेवा के बाद घर बनाने के लिए तय 500 वर्ग मीटर से कम जमीन खरीदने के हकदार रहेंगे।