सर्दियों के मौसम में बच्चों में वायरल के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) और दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) जोनल अस्पताल शिमला की ओपीडी में औसतन 100 के करीब बच्चे उपचार के लिए हर रोज लाए जा रहे हैं। इनमें वायरल संक्रमण वाले बच्चों की संख्या 20 तक है। इसके अलावा कुछ बच्चों को सांस लेने में भी दिक्कतें हो रही हैं। इसके चलते आईजीएमसी में औसतन 2 से 3 बच्चों को चिकित्सकों की निगरानी में दाखिल किया जा रहा है।
शहर के आईजीएमसी और डीडीयू अस्पताल में रोजाना माता-पिता अपने बच्चों को वायरल संक्रमण की जद में आने के बाद उपचार के लिए ला रहे हैं। इन बच्चों की आयु 6 महीने से लेकर 10 साल तक की है। आईजीएमसी बाल रोग विभाग के डॉ. विपन रोच ने बताया कि वायरल संक्रमण एक गंभीर समस्या है जोकि बच्चों की सेहत को प्रभावित करती हैं। इसमें जिन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उन बच्चों में यह संक्रमण जल्दी फैल जाता है। माता-पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चों के लक्षणों पर नजर रखें और किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत चिकित्सा सलाह लें।
वायरल संक्रमण के लक्षण
बुखार आना, नाक चलना, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और थकान महसूस होना वायरल संक्रमण के मुख्य लक्षण हैं।
संक्रमित व्यक्ति से रहें दूर : डॉ. राणा
डीडीयू अस्पताल के बाल रोग विभाग के डॉ. राजेश राणा ने बताया कि बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डलवाएं। इसके अलावा बच्चों को संक्रमित व्यक्तियों से दूर रखें। इसके अलावा ताजे फल, सब्जियां और पर्याप्त पानी पीयें ताकि उनकी इम्यूनिटी मजबूत रहे।