स्कूल में बच्चे के दाखिले से पहले अभिभावकों को उसका टीकाकरण प्रमाणपत्र देना होगा। यह प्रावधान पहली कक्षा में दाखिले के लिए किया गया है। संपूर्ण टीकाकरण अनिवार्य करने की दिशा में यह अहम कदम होगा। इससे सुनिश्चित होगा कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से न छूटे। सभी बच्चे जिनका आंशिक रूप से टीकाकरण हुआ होगा, उन्हें शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से संयुक्त रूप से ट्रैक किया जाएगा।
यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन परमार ने दी। कहा कि बच्चे के दाखिले के दौरान उसका संपूर्ण टीकाकरण अनिवार्य करने को शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग का सहयोग लिया जा रहा है। पहली कक्षा में छात्र के प्रवेश से पहले अभिभावकों को टीकाकरण की अनुसूची के अनुसार पूर्ण टीकाकरण की पुष्टि के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता की तरफ से हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र लेना होगा।
यह स्कूल में प्रवेश के दौरान जमा करवाया जाएगा। टीकाकरण कार्यक्रम की सूची सभी प्राथमिक विद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों में दर्शाई जाएगी। कहा कि मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड की काउंटर फाइल बच्चे के संपूर्ण टीकाकरण का सबूत होगा। मंत्री ने कहा कि राज्य में नए कोल्ड चेन स्थल स्थापित किए हैं।
इनमें सुनिश्चित किया है कि लाभार्थी को घर-द्वार के पास टीकाकरण की सुविधा हो। टीकाकरण की शत-प्रतिशत कवरेज को कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। हर माह इसकी समीक्षा की जा रही है।
मुफ्त दिए जा रहे 11 तरह की बीमारियों के टीके- ग्राम स्वराज अभियान में दस जिलों के 93 गांवों में 23 से 27 अप्रैल तक सघन मिशन इंद्रधनुष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान टीकाकरण से छूटे 77 बच्चों और 15 गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनका टीकाकरण कर संपूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य हासिल किया।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य के सभी अस्पतालों और उपस्वास्थ्य केंद्रों में 11 तरह की बीमारियों के टीके बिलकुल मुफ्त दिए जा रहे हैं। इनमें क्षय रोग, पोलियो, काली खांसी, गलघोंटू, टेटनस, निमोनिया, खसरा, रुबेला, हेपेटाइटिस हेमोफिलस इन्फ्लूएंजा टाइप-बी शामिल हैं। प्रदेश में टीकाकरण नवीनतम टेक्नोलॉजी आटो डिसेबल्ड सीरिंज से किया जा रहा है।