अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए गुप्ता ने कहा कि दोनों के खिलाफ विजिलेंस, ईडी और सीबीआई जांच चल रही है। अधिवक्ता विनय शर्मा की शिकायत बेबुनियाद है। पूरे मामले के पीछे ये अधिकारी हैं। गुप्ता ने कहा कि सीएम के आश्वासन के बाद प्रबोध सक्सेना के ओडीआई मामले में ऊर्जा सचिव राकेश कंवर से भी रिपोर्ट मांगी गई है। अधिवक्ता विनय शर्मा ने छोटा शिमला थाने में शिकायत कर उन पर तीन एकड़ जमीन घूस लेकर खरीदने का निराधार आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह जमीन 1 करोड़ 38 लाख रुपये में खरीदी। कलेक्टर रेट एक करोड़ दस लाख रुपये का है। उन्होंने जून 2025 में अपना जीपीएफ निकाला। उन्होंने इसकी प्रति भी दिखाई।
शिकायत में प्रिवेंशन टू करप्शन एक्ट की धारा 13 (1)डी-ए के तहत कार्रवाई को लिखना गलत है। यह धारा डिलीट हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जब वह बिजली बोर्ड के अध्यक्ष थे तो उन्होंने बोर्ड के लिए 500 करोड़ का लाभ कमाया। इसकी वजह से मुख्यमंत्री ने उनका काम देखते हुए उन्हें मुख्य सचिव लगाया। कुछ अधिकारियों को इससे तकलीफ हो रही है कि यह कैसे हो गया, क्योंकि 3700 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था। गुप्ता ने कहा कि पूर्व सीएमडी आरडी धीमान और एक अधिकारी ग्रोवर के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो में दो एफआईआर दर्ज हैं। यह मामला ईडी ने भी टेकओवर कर लिया है।
एक मामला गिलवर्ट इस्पात मामले में 10 से 12 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। दूसरा 130 करोड़ रुपये की लाइन रेगुलेटर के ऑर्डर के वाॅयलेशन में कुनिहार नालागढ़ लाइन बनाने का है। जांच चल रही है। आरडी धीमान के खिलाफ एक एक्सईएन ने जबरदस्ती करवाने का कोर्ट में बयान दे दिया है। भाजपा और माकपा को भी गलत तथ्य दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामला रेरा से भी अप्रूव है। यह बात रेरा के पूर्व अध्यक्ष श्रीकांत बाल्दी से भी पूछी जानी चाहिए, जिन्होंने एप्रूव किया। जब इतनी हेराफेरी थी तो रेरा ने इसे कैसे अप्रूव किया। नक्शों का आदेश देवेश कुमार ने दिया था। इसे आयुक्त ने नहीं माना तो मामला सरकार के पास दोबारा आया।
अपने ऊपर लगे आरोपों को मोड़ रहे मुख्य सचिव : सक्सेना
बिजली बोर्ड के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए आरोपों का यह मामला दो बार हाईकोर्ट में जा चुका है। दोनों बार ही खारिज हो चुका है। मामला हाईकोर्ट से डिसमिस होने के बाद प्रधानमंत्री उन्हें मुख्य सचिव पद पर एक्सटेंशन भी दे चुके हैं। अपने ऊपर लगाए आरोपों को मोड़ने के लिए मुख्य सचिव इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
ध्यान डायवर्ट करने के लिए कर रहे ऐसी बातें : धीमान
रेरा के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्य सचिव आरडी धीमान ने कहा कि वह 2011-12 में सीएमडी थे तो उस वक्त की बात कर रहे हैं। बिजली बोर्ड में जो भी फैसले होते हैं वह व्यक्तिगत तौर पर नहीं लिए जाते हैं। इसे निदेशक मंडल लेता है। उन्होंने जनहित को ध्यान पर रखकर ही काम किया। मुख्य सचिव अपने ऊपर लगे आरोपों से ध्यान डायवर्ट करने के लिए इस तरह की बातें कर रहे हैं। इस बारे में कोई भी जांच कर लें, मगर उन्होंने निष्ठा से काम किया है।