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नर्सिंग कॉलेज में छापेमारी, चेयरमैन पर केस

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हिमाचल के ऊना के लोअर बसाल में चल रहे नर्सिंग कॉलेज के चेयरमैन के खिलाफ शिमला के बालूगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। बुधवार को एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) से संबंधित नर्सिंग कॉलेज का रिकॉर्ड लेकर जांच शुरू कर दी है। पूर्व डीजीपी डीएस मन्हास का बेटा अमिल मन्हास इस संस्थान का चेयरमैन बताया जा रहा है।
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एफआईआर में पुलिस ने फिलहाल संस्थान के चेयरमैन का जिक्र किया है, नाम से किसी को नामजद नहीं किया गया है। सभी जगहों से दस्तावेज हासिल करने के बाद मुकदमे में नाम जोड़े जा सकते हैं। उधर, बुधवार को ही डीएसपी की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम ऊना के बसाल कॉलेज भी पहुंची।

हालांकि इस दौरान संस्थान के चेयरमैन मौजूद नहीं थे। स्टाफ ने पूरे दस्तावेज देने में असमर्थता जताई। लिहाजा, पुलिस टीम ऊना में ही रुक गई है। वीरवार को पूरे रिकॉर्ड को कब्जे में लेने के बाद ही टीम शिमला लौट सकती है।
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जानिए क्या है पूरा मामला

बीते सोमवार को प्रदेश विश्वविद्यालय के कुल सचिव ने एसपी शिमला को लिखित में शिकायत सौंपी। शिकायत में नर्सिंग कॉलेज में फर्जी दस्तावेज तैयार कर बीएससी नर्सिंग के बैच बैठाने की जानकारी दी। पुलिस को बताया गया, संस्थान को अक्तूबर 2012 में शुरू होने वाले सत्र के लिए इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने मान्यता दी लेकिन 2013-14 और 2014-15 के लिए अनुमति नहीं दी गई।

प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से ट्रस्ट के चेयरमैन और कॉलेज प्रिंसिपल को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। लेकिन संस्थान से निर्धारित समय पर कोई भी जवाब नहीं मिला। अंततः विश्वविद्यालय ने फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत पुलिस में की।
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नर्सिंग छात्राओं के भविष्य पर तलवार

वहीं, संस्थान में शिक्षा ग्रहण कर रही छात्राओं के भविष्य पर तलवार लटक गई है। छात्राओं के अभिभावक भी इस मामले के सामने आने के बाद से सकते में हैं। जिले के लोअर बसाल में चल रहे नर्सिंग कॉलेज को वर्ष 2012 में नर्सिंग बैच बिठाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन उसके बाद 2013 से लेकर आज तक संस्थान को इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने बैच बिठाने की मान्यता नहीं दी है।

हालांकि संस्थान प्रबंधक इस मसले के हाईकोर्ट में लंबित होने की दलील दे रहे हैं लेकिन सवाल संस्थान में शिक्षा ग्रहण करने वाली छात्राओं के भविष्य का क्या। हाल, फिलहाल संस्थान के पास आईएनसी की कोई मान्यता नहीं है। ऐसे में छात्राओं का कोर्स भी संस्थान की तरह की फर्जी माना जाएगा।

लाखों रुपये बर्बाद होने के साथ-साथ कैरियर शुरू होने से पहले ही तबाही के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है। प्रदेश विश्वविद्यालय के कुल सचिव की ओर से किए गए इस खुलासे और शिमला पुलिस के पास शिकायत के बाद उक्त संस्थान चर्चाओं का केंद्र बन गया है।
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