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इस साल पिंदड़ी का स्वाद चखने मायके नहीं जा पाएंगी बेटियां

Sun, 05 Apr 2020 12:54 PM IST
अरविन्द ठाकुर पंकज सलारिया, अमर उजाला नेटवर्क, चंबा
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सूही माता - फोटो : अमर उजाला
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सूही माता मेले के समापन के बाद 14 अप्रैल को इस बार बेटियां अपने मायके पिंदड़ी का स्वाद चखने नहीं जा पाएंगी। कोरोना वायरस से मरीजों की बढ़ती संख्या और देश भर में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन से ऐसा नहीं हो पाएगा। जिले में हर साल सूही मेले का आयोजन किया जाता है। तीन दिन तक चलने वाला यह मेला बच्चों और महिलाओं के लिए होता है।

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रानी सुनैना के बलिदान को चंबा शहर के लोग याद करते हैं। इसके बाद 14 अप्रैल को बसोआ का आयोजन किया जाता है। इसके लिए मायका पक्ष से विवाहित बेटियों को सादा (निमंत्रण) भेजा जाता है। बेटियां 14 अप्रैल को अपने मायके आती हैं और त्योहार का प्रमुख व्यंजन पिंदड़ी का स्वाद चखती हैं। बेटी के मायके आने पर परिजन कई प्रकार के व्यंजन बनाते हैं और बेटियों को परोसते हैं।

इस बार कोराना के चलते इस आयोजन पर संकट आ गया है। सूही माता मेले को लेकर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन आने वाले दिनों में इस पर तस्वीर साफ करने की बात कह रहा है। उधर, एसडीएम चंबा शिवम प्रताप सिंह ने बताया कि यह मामला उनके ध्यान में है। कहा कि कोरोना वायरस के चलते मेले के आयोजन को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है। जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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इसलिए मनाया जाता है मेला
मान्यता है कि रानी सुनैना ने शहर में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए समाधि ली थी। रानी को एक स्वप्न आया था, जिसके बाद रानी ने समाधि ली और उसके बाद पानी की किल्लत चंबा में दूर हुई।

ऐसे बनती है पिंदड़ी 
पिंदड़ी बनाने के लिए गेहूं और कोदरा के आटे को हल्की आंच पर पकाने के बाद छाछ से गूंथा जाता है। इसके बाद छोटी-छोटी गोल पिन्नियां बनाई जाती हैं। इसके बाद हरे पत्तों में रखकर टोकरी में रखा जाता है। अगले दिन इसे परोसा जाता है।

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