सूत्रों की मानें तो सीएम के करीबियों में अब तक ताजपोशी से वंचित नेताओं के नामों पर खूब चर्चा चल रही है। इनमें पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों और अन्य तमाम नेताओं के नामों पर विचार चल रहा है। कई नेता इसके लिए लगातार दबाव भी बना रहे हैं।
मगर इस बीच इस बात पर भी गौर किया जा रहा है कि ताजपोशियों के लिए एक अनार सौ बीमार की स्थिति बनी हुई है। कहीं ऐसा न हो कि करीब तीन दर्जन बोर्डों-निगमों में तमाम ताजपोशियों के बाद भी भाजपा के कई नेता असंतुष्ट ही रहें।
इसका गलत असर आगे लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह भी संभव है कि दर्जन भर नेताओं की तैनाती बाकी पदों को खाली ही छोड़ दिया जाए।