इस दौरान परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार, आयु, सामाजिक स्थिति जैसी जानकारियां जुटाई जाएंगी। हालांकि, जाति आधारित आंकड़ों को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। केंद्र सरकार से दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। राज्य में इस महाअभियान की औपचारिक शुरुआत एक जून को राज्यपाल कविंद्र गुप्ता और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से जानकारी एकत्र कर की जाएगी, जो इसे प्रतीकात्मक रूप से आरंभ करेंगे। इसके बाद प्रदेशभर में निर्धारित कर्मी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे। जनगणना के आंकड़े प्रदेश की भविष्य की नीतियों, विकास योजनाओं और संसाधनों के बेहतर वितरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत ढांचे के विस्तार में इन आंकड़ों की अहम भूमिका रहेगी। पूरे देश में जनगणना के प्रारंभिक आंकड़े एक मार्च 2027 को जारी करने का लक्ष्य रखा गया है।
शिक्षा विभाग से लगेंगी सबसे अधिक ड्यूटियां
जनगणना के लिए शिक्षा विभाग से सबसे अधिक ड्यूटियां लगेंगी। उपायुक्तों को विभिन्न विभागों से ड्यूटी के लिए स्टाफ चुनने का अधिकार दिया गया है। शिक्षकों और गैर शिक्षकों के अलावा स्वास्थ्य, लोकनिर्माण, जल शक्ति सहित अन्य विभागों से भी कर्मचारियों को लगाया जाएगा। एक से 15 जून तक तक जिला स्तर पर कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जनगणना में पूछे जाएंगे 33 तरह के सवाल
केंद्र सरकार ने जनगणना के पहले चरण के लिए 33 महत्वपूर्ण सवाल जारी किए हैं। इसके साथ ही एक एफएक्यू (अकसर पूछे जाने वाले सवाल) पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां नागरिक खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। पहले चरण में घर और परिवार से जुड़ी कई अहम जानकारियां जुटाई जाएंगी। इसमें मकान का नंबर और संरचना, फर्श, दीवार और छत में इस्तेमाल सामग्री, घर की स्थिति और उपयोग, परिवार में रहने वाले लोगों की संख्या, शादीशुदा जोड़ों की संख्या, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और सामाजिक वर्ग, खाने की आदतें और इस्तेमाल होने वाले अनाज, वाहन और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता जैसे सवाल मुख्य रूप से शामिल है।
घर-घर जाकर होगा डिजिटल सर्वे
गणनाकार (एन्यूमरेटर), जो आमतौर पर सरकारी शिक्षक होंगे, अपने टैबलेट या मोबाइल एप में घर-घर जाकर सभी जानकारियां दर्ज करेंगे। हर घर का लोकेशन, सुविधाएं, परिवार के सदस्यों की शिक्षा, भाषा, धर्म, रोजगार, विकलांगता, प्रवासन और अन्य जरूरी विवरण रिकॉर्ड किए जाएंगे। एप में डाले जाने वाले पाटा की सुरक्षा के लिए विशेष तकनीकी फीचर जोड़े गए हैं, जिससे कोई डाटा लीक या गड़बड़ी न हो। लोग मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी खुद भी भर सकेंगे। इससे प्रक्रिया तेज होगी और सिस्टम का भार कम होगा। जिन लोगों के पास मोबाइल या इंटरनेट नहीं है, उनके लिए फील्ड कर्मचारी घर-घर जाकर डाटा दर्ज करेंगे।