हिमाचल प्रदेश के गांवों में जलवायु परिवर्तन से अनुकूलन के प्रयास पहले से चल रहे हैं। यह जानकारी काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के एक अध्ययन से सामने आई है। इसे इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (इसीमोड) के सहयोग से किया गया है। अध्ययन में मंडी, कुल्लू, सिरमौर और शिमला जिलों की 12 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया। इन पंचायतों में किसान नई फसलें अपना रहे हैं और जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर रहे हैं। शोघी में राज्य की पहली ग्राम आपदा प्रबंधन समिति भी गठित की गई है। रिपोर्ट को शनिवार को हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा के अतिरिक्त सचिव निशांत ठाकुर ने जारी किया। इस अवसर पर डॉ. अमीना महर्जन और राजीव अहल भी उपस्थित थे। सीईईडब्ल्यू ने स्ट्रैटेजिक फोरसाइट पद्धति का उपयोग कर 25 अनुकूलन समाधान खोजे हैं। इन समाधानों को 30 से अधिक सरकारी नीतियों से मदद मिल सकती है।