पुलिस ने डीवीआर को सीएफएसएल भेजा, नियमों के तहत 30 दिन का रिकॉर्ड रखना है जरूरी
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पुलिस ने गैर ईरादतन हत्या का केस किया है दर्ज अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पूर्व सैनिक संदीप की मौत के मामले नशा मुक्ति केंद्र के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है। पुलिस को आशंका है कि इस डाटा डिलीट कर दिया है।
पुलिस ने डाटा रिट्रीव (पुनः प्राप्त करना) करने के लिए सीएफएसएल को (डीवीआर) डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर भेज दिया है। आरोपियों पर सबूतों से छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जिले के सभी नशा मुक्ति केंद्रों में प्रशासन ने भर्ती मरीजों की सुरक्षा की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे स्थापित करवाए हैं। सभी केंद्रों के संचालकों को सीसीटीवी कैमरों का 30 दिन का रिकॉर्ड रखना जरूरी है लेकिन उपरोक्त केंद्र में उस दिन का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है जब केंद्र का स्टाफ पूर्व सैनिक संदीप को उनके घर से लेकर आए थे। आरोप है कि इस दौरान केंद्र में संदीप से बेरहमी से मारपीट की गई जिससे उसकी मौत हो गई।
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तबीयत बिगड़ने पर संदीप को स्टाफ पहले पंथाघाटी के निजी अस्पताल में लेकर गए जहां उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उसे आईजीएमसी ले जाया गया लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। आईजीएमसी में पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर कई जगह चोट के निशान, खरोंचें और नीले पड़ चुके घाव मिले हैं। मामले की सूचना परिजनों को मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की छानबीन शुरू की। पुलिस ने इस मामले में केंद्र के निदेशक और स्टाफ समेत चार लोगों के खिलाफ गैर ईरादतन हत्या का केस दर्जकर गिरफ्तार किया है। आरोपियों से मारपीट में इस्तेमाल किए गए डंडे या अन्य सामान को रिकवर करने को लेकर पूछताछ की जा रही है। इस पूरे मामले से जिले में नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले केंद्र में एक व्यक्ति के साथ मारपीट का मामला सामने आ चुका है। इसको लेकर मरीज के भाई ने जिला प्रशासन को लिखित शिकायत की थी। प्रदेश के कई नशा मुक्ति केंद्रों में बेरहमी से मारपीट की कई घटनाएं सामने आ चुकी है। इसमें कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं।
कोट नियमों के अनुसार सभी नशा मुक्ति केंद्रों को 30 दिन का सीसीटीवी का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। इस मामले में यदि सीसीटीवी फुटेज डिलीट की गई है और पुलिस इसकी स्टेटस रिपोर्ट हमें सौंपती है तो इस संबंध में आगामी कार्रवाई की जाएगी। -दिव्यांशु सिंगल, एडीसी शिमला