फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिमला रेप केसः मामले की जांच को लेकर सीबीआई ने किया ये दावा

Fri, 01 Dec 2017 08:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
बहुचर्चित गुड़िया प्रकरण में सीबीआई ने हाईकोर्ट में सातवीं स्टेटस रिपोर्ट पेश की। सीबीआई का दावा है कि गुडि़या मामले की जांच सही दिशा में है। अभी जांचगत कारणों से तथ्यों का खुलासा नहीं कर रहे हैं। 
विज्ञापन




सूरज हत्याकांड की तरह ही इस मूल मामले की जांच भी गंभीरता से की जा रही है। सीबीआई के अधिवक्ता अंशुल बंसल ने बताया कि इस केस की छानबीन को तीन टीमें बना रखी हैं। ये दांदी जंगल से लेकर तमाम क्षेत्रों में जांच करने के लिए जुटी हुई हैं।

जल्दी ही तह तक पहुंचेगी सीबीआई

वीरवार को हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट देने के बाद अधिवक्ता अंशुल बंसल ने आश्वस्त किया कि सीबीआई गुडि़या मामले में भी जल्दी ही तह तक पहुंचेगी। इस प्रकरण की जांच का नतीजा जनता के सामने होगा। 

ये लोगों की आशाओं पर खरा उतरेगा। अंशुल बंसल बोले कि लॉकअप मामले में आरोपी पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी के खिलाफ भी अनुपूरक चालान जल्दी ही अदालत में पेश किया जाएगा।

इस कारण हुई सूरज की मौत

अधिवक्ता अंशुल बंसल ने कहा कि पुलिस हिरासत में आरोपी सूरज की हत्या राजू ने नहीं की थी, बल्कि पुलिस हिरासत में उसकी मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्रताड़ना के चलते सूरज की मौत हुई थी।

उन्होंने कहा कि गुड़िया प्रकरण और हिरासत हत्या मामले में करीब 600 पन्नों की चार्जशीट के अलावा स्टेट्स रिपोर्ट हाइकोर्ट में पेश की गई। चार्जशीट में सामने आए साक्ष्यों से स्पष्‍ट होता है कि सूरत की हत्या राजू ने नहीं की थी।

किसके इशारे पर हिरासत में पिटते रहे संदिग्ध आरोपी 

आखिर गुड़िया मामला सीबीआई के सुपुर्द करने के एलान के बाद हिरासत में बंद आरोपियों से पुलिस सख्ती से क्यों पूछताछ करती रही? क्या सिर्फ पुलिस इन पांच आरोपियों से गुड़िया का गुनाह जबरदस्ती कबूल करवाना चाह रही थी?

अगर वह कबूल करवा भी लेते तो जब सीबीआई जांच होती तो भी यह आरोपी बेदाग निकल जाते। यह जानते हुए भी कि मामला सीबीआई को जा रहा है तो गुड़िया प्रकरण में इतनी दिलचस्पी क्यों ली जा रही थी।

सीबीआई जांच में साफ हो गया है कि गुड़िया के जुर्म को कबूलने के लिए इनसे यह जबरदस्ती की जा रही थी लेकिन जांच में अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इसकी असल वजह क्या थी। क्या पुलिस के अफसर किसी के दबाव में काम कर रहे थे या माजरा ही कुछ और था।


इन सवालों के साफ और स्पष्ट जवाब आज भी आम जनता को नहीं मिल पाए हैं। यह केस पूरी तरह से पहेली बन चुका है। सीबीआई को केस देने के एलान के बाद शिमला से गए एसआईटी के सदस्य लौट आए थे।

वहां स्थानीय पुलिस अफसर ही मौजूद थे और वही आरोपियों से सख्ती से पूछताछ कर रहे थे। अमूमन इस तरह के  मामले में पुलिस जांच से अपने हाथ पीछे खींच लेती है, जब उन्हें पता हो कि अब मामले की जांच सीबीआई करेगी। लेकिन इस केस में उल्टा हुआ।

एसआईटी के कुछ सदस्य लगातार आरोपियों से पूछताछ करते रहे और लॉकअप में एक आरोपी सूरज की मौत भी हो गई। इससे केस और भी ज्यादा उलझ गया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर आम जनता का संदेह और पक्का हो गया।

सीबीआई जांच में भी संबंधित पुलिस अफसर गिरफ्तार किए गए और उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई। लेकिन इन सबके पीछे पुलिस क्या सिर्फ अपनी खाल बचाने के लिए संदिग्ध आरोपियों से डंडे के जोर पर अपराध कबूल करवाना चाहती थी या फिर इसके पीछे कोई गहरी साजिश है? इसका खुलासा अब तक सीबीआई भी नहीं कर पाई है।  

गुड़िया मामले में कब क्या हुआ

4 जुलाई करीब 4:20 बजे गुड़िया महासू स्कूल से अपने घर के लिए निकली
5 जुलाई गुड़िया का भाई मामा के घर से जब अपने घर गया तो उससे परिजनों ने गुड़िया के बारे में पूछा, उसने बताया कि गुड़िया तो पिछले कल घर आ गई थी। परिजनों और ग्रामीणों ने रात को गुड़िया की तलाश शुरू कर दी।
6 जुलाई  गुड़िया के मामा को हलाइला गांव के निकट दो सड़कों के लिंक से नीचे एक गड्ढे में गुड़िया का शव छिन्न-भिन्न हालत में मिला। पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
7 जुलाई  गुड़िया के शव का आईजीएमसी शिमला में पोस्टमार्टम हुआ, दुराचार और हत्या का खुलासा। विसरा फ ोरेंसिक लैब को भेजा।
8 जुलाई  पुलिस दरिंदों तक नहीं पहुंची, जनाक्रोश भड़का। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी के निर्देश पर एसपी ने कोटखाई में कैंप किया।
10 जुलाई  एसपी को जांच से हटाया, आईजी जहूर एच जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित।
11 जुलाई  पीड़ित परिवार को पांच लाख मुआवजा।
12 जुलाई  सीएम के फेसबुक पेज पर फोटो वायरल। सोशल मीडिया पर कुछ संदिग्ध आरोपियों की फोटो वायरल।
13 जुलाई  एसआईटी ने छह लोगों को गिरफ्तार किया।
14 जुलाई  ठियोग थाने पर पथराव, सीबीआई जांच की संस्तुति।
विज्ञापन

16 नवंबर को गिरफ्तार हुए डीडब्ल्यू नेगी

15 जुलाई  सीबीआई जांच के लिए राज्य सरकार ने पीएम को पत्र लिखा।
17 जुलाई  राजभवन पहुंची भाजपा ने सरकार की बर्खास्तगी की मांग उठाई।
18 जुलाई  सरकार ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच शुरू करने के लिए दाखिल किया आवेदन।
19 जुलाई  कोटखाई थाने में एक आरोपी की पुलिस हिरासत में हत्या
23 जुलाई  सीबीआई ने दर्ज किए दो मामले।
24 जुलाई  सीबीआई पहुंची शिमला, जांच शुरू
2 अगस्त  हिमाचल हाईकोर्ट में सौंपी स्टेटस रिपोर्ट, दो सप्ताह का समय मांगा
14 अगस्त  कोटखाई थाने में तैनात संतरी के हुए बयान
17 अगस्त  सीबीआई को हाईकोर्ट की फटकार,  मांगा दो सप्ताह का समय
21 अगस्त  सीबीआई ने कई रईसजादों के घरों पर मारे छापे
29 अगस्त  सीबीआई ने आईजी जहूर एच जैदी के साथ अन्य पुलिस के अफसरों को गिरफ्तार किया
14 अक्तूबर  आरोपी आशीष चौहान जमानत पर रिहा
17 अक्तूबर गुड़िया प्रकरण में पकड़े गए चार अन्य आरोपियों को भी जमानत
16 नवंबर  सीबीआई ने एसपी डीडब्ल्यू नेगी को गिरफ्तार किया
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें