यहां से ही शिक्षा विभाग ने करीब 90 लाख रुपये से यह वेबपोर्टल तैयार किया था। लेकिन इसी वैब पोर्टल की खामियों के कारण प्रदेश के लाखों बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति को निजी शिक्षण संस्थानों ने हड़प लिया।
इसमें एक ही नंबर और खाता नंबर से कई बच्चों की छात्रवृत्ति हासिल कर ली गई थी, जबकि लाखों के वेबपोर्टल में इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कोई पुख्ता सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई गई थी। हैदराबाद का ‘सेंटर फॉर गुड गर्वनेंस’ नाम का यह संस्थान देश भर विभागों के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करता है।
बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में बहुत जल्द गिरफ्तारियां हो सकती हैं। करीब 250 करोड़ रुपये के इस घोटाले में सीबीआई को ठोस सबूत मिले हैं। जल्दी ही दस्तावेज देखे बगैर बजट जारी करने वाले अधिकारी टंग सकते हैं। दूसरी ओर शिक्षा विभाग और बैंकों के कई अधिकारियों तथा कर्मचारियों को सरकारी गवाह बनाने की भी तैयारी है।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि छात्रवृत्ति घोटाले में बहुत जल्दी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें ऐसे लोगों की सूची बनाई जा रही है, जिनकी इस घोटाले में सीधी संलिप्तता रही है। ऐसे लोगों के बारे में कई गंभीर सबूत भी जुटाए गए हैं।