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मुश्किल में फंसे सीएम वीरभद्र, सीबीआई ने शुरू की जांच

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ललित मोदी के वीजा विवाद में सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे की भूमिका को लेकर गरमाई सियासत के बीच सीबीआई ने हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में नई जांच शुरू की है। 6.1 करोड़ रुपये के इस मामले में एजेंसी ने प्रिलिमनरी इन्क्वायरी (पीई) दर्ज कर वीरभद्र की पत्नी प्रतिभा सिंह, बेटे विक्रमादित्य सिंह और बेटी अपराजिता को भी जांच के दायरे में ले लिया है।
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इस मामले में आनंद चौहान नाम के एलआईसी एजेंट को भी आरोपी बनाया गया है। एक दिन पहले ही सीबीआई ने गुजरात के कांग्रेसी नेता शंकर सिंह वाघेला के खिलाफ 2006-07 के एक मामले में भ्रष्टाचार की जांच शुरू कर उनके ठिकानों पर सघन छापेमारी की है।

2009 से 2011 के बीच का है मामला

सीबीआई के मुताबिक, वीरभद्र के खिलाफ यह मामला 2009 से 2011 के बीच का है जब वह केंद्र की यूपीए सरकार में इस्पात मंत्री थे। सबसे लंबे समय तक हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे 80 वर्षीय वीरभद्र के खिलाफ उनकी पत्नी और बच्चों को दिए गए लोन के बदले एक निजी कंपनी को भारी फायदा पहुंचाने के मामले की भी जांच चल रही है।

सीबीआई के मुताबिक, पीई के तहत की जा रही जांच में ठोस सबूत मिले तो हिमाचल के मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। दरअसल, यह मामला 2012 में भोपाल की एक कंपनी में आयकर विभाग के छापे से शुरू हुआ था। इस छापेमारी में मिली एक डायरी में वीबीएस नाम के आगे मोटी रकम लिखी गई थी।
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'राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से निशाना बनाया जा रहे मुझे'

जांच में पता चला कि वीबीएस का मतलब वीरभद्र सिंह है। हालांकि पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के उस मामले में वीरभद्र को सीबीआई से राहत मिल चुकी है। अब सीबीआई ने उसी प्रकरण से आय से अधिक संपत्ति का नया मामला निकाल कर उसकी जांच शुरू की है। आरोप यह कि वीरभद्र ने भारतीय जीवन बीमा निगम के आनंद चौहान नाम के एक एजेंट के जरिए 6.1 करोड़ रुपये की पॉलिसी ली थी।

पीई के मुताबिक, यह रकम वीरभद्र के आय के ज्ञात स्रोत से अधिक है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से निशाना बनाया जा रहा है। ये जांच भी इसी का हिस्सा है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कहने पर एनडीए सरकार इसे अंजाम दे रही है। पहले भी दो बार मुकदमों का सामना किया है और निर्दोष बरी हुआ हूं।

भाजपा ने हताशा में ऐसा जान बूझकर किया है। मामला माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है, लेकिन सीबीआई ने जिस प्रकार जल्दबाजी दिखाई है, उससे स्पष्ट है कि सीबीआई राजनीतिक दबाव में कार्य कर रही है। न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और निर्दोष साबित होंगे।
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