हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह और अन्य के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में आरोपपत्र तैयार हो गया है।
सीबीआई ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट को यह जानकारी देते हुए संबंधित अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने की इजाजत प्रदान करने का आग्रह किया। न्यायमूर्ति एके पाठक ने व्यक्तिगत कारणों से इस मामले की सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिका दूसरी खंडपीठ के पास स्थानांतरित कर दी।
दूसरी बेंच में अब यह मामला 30 अगस्त को लगेगा। वीरभद्र सिंह के वकील ने अदालत से मामले में अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, वहीं सीबीआई की ओर से पेश अधिवक्ता संजीव भंडारी ने उनके तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आरोपपत्र तैयार है, ऐसे में जल्द सुनवाई की जाए।
जानिए कब क्या हुआ इस केस में
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वीरभद्र सिंह की याचिका पर एक अक्तूबर 2015 को अपने अंतरिम आदेश में उनकी गिरफ्तारी, पूछताछ या अदालत की अनुमति के बिना इस मामले में उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने पर रोक लगा दी थी।
सीबीआई ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी और अदालत ने इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया था, लेकिन अंतरिम आदेश बरकरार रखा था। इसके बाद वीरभद्र ने आय से अधिक संपत्ति मामले में अपनी संभावित गिरफ्तारी रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल 2016 को वीरभद्र सिंह को जांच में शामिल होने का निर्देश दिया, लेकिन गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
ये है पूरा मामला
आरोप है कि वर्ष 2009-12 के दौरान यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहते वीरभद्र सिंह ने अपने परिवार के नाम पर आय से अधिक संपत्ति जमा की। वीरभद्र ने कथित अवैध धन को खुद, पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर एलआईसी में निवेश किया और उसे कृषि से प्राप्त आय के रूप में दिखा दिया।
सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि वीरभद्र सिंह ने कथित रूप से अवैध तरीके से 10 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई है। एफआईआर में वीरभद्र सिंह उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान और चुन्नी लाल चौहान का नाम है।