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Shimla News: कैशलेस उपचार से इन्कार, कंपनी को देना होगा 4.82 लाख क्लेम

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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का फैसला
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मानसिक प्रताड़ना और मुकदमा खर्च के 50 हजार भी देने होंगे
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने दिल की बीमारी के उपचार के लिए कैशलेस सुविधा देने से इन्कार करने पर निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को कड़ी फटकार लगाई है।
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 4,82,823 रुपये की क्लेम राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके साथ ही मानसिक प्रताड़ना और मुकदमा खर्च के तौर पर 50,000 रुपये देने का आदेश भी दिया है। बीमा कंपनी को इस आदेश की अनुपालना 45 दिन के भीतर करनी होगी। घणाहट्टी (शिमला) निवासी उचित पवन भंडारी ने आयोग के समक्ष दायर शिकायत में बताया था कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने वर्ष 2020 में सभी जरूरी मेडिकल जांच और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद निवा बूपा से मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी। इस पॉलिसी को वर्ष 2025 तक नियमित रूप से रिन्यू करवाया गया। वर्ष 2024 में इसका प्रीमियम बढ़ाकर करीब एक लाख रुपये कर दिया गया था।
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अप्रैल 2025 में दिल की बीमारी के चलते मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल साकेत (नई दिल्ली) के डॉक्टरों ने शिकायतकर्ता को डुअल चेंबर पेसमेकर लगाने की सलाह दी थी। अस्पताल प्रबंधन ने 4,82,823 रुपये के अनुमानित खर्च के लिए बीमा कंपनी को कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन भेजा। बीमा कंपनी ने बीमारी की शुरुआती अवधि और पुराने चिकित्सीय परामर्श पत्रों की मांग करते हुए तकनीकी आधार पर कैशलेस सुविधा देने से इन्कार कर दिया और रीइंबर्समेंट क्लेम करने की सलाह दी।
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आयोग की टिप्पणीआयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि शिकायतकर्ता की पॉलिसी वर्ष 2020 से लगातार वैध थी। ऐसे में वेटिंग पीरियड या पहले से मौजूद बीमारी (प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज) का नियम इस मामले में लागू नहीं होता। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी जारी करते समय हुए मेडिकल टेस्ट से इन्कार नहीं किया है। आईआरडीए के निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट के गुरमेल सिंह बनाम ब्रांच मैनेजर, एनआईसी मामले के फैसले के तहत बीमा कंपनियां तकनीकी कारणों या ऐसे दस्तावेजों की आड़ में वास्तविक क्लेम खारिज नहीं कर सकतीं। आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार करार देते हुए बीमा कंपनी को पूरी क्लेम राशि ब्याज सहित लौटाने और हर्जाना भरने का आदेश दिया।
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