प्रदेश के दस जिलों (किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर) में स्थित 16 डिग्री कॉलेजों में वोकेशनल डिग्री शुरू करने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। सितंबर से कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। सितंबर अंत तक कक्षाएं शुरू होंगी। जिला मुख्यालय स्थित कॉलेजों में रिटेल मैनेजमेंट और हॉस्पिटेलिटी एंड टूरिज्म विषय में बैचलर डिग्री होगी।
दोनों विषयों के सिलेबस को एचपीयू के बोर्ड ऑफ स्टडी ने मंजूरी दे दी है। 31 अगस्त को होने वाली विवि की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में सिलेबस को अंतिम मंजूरी मिलेगी। वोकेशनल डिग्री करने वाले विद्यार्थियों की इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग और पढ़ाई के बाद प्लेसमेंट दिलाने में प्रदेश कौशल विकास निगम मदद करेगा। बीए, बीएससी और बीकॉम में प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों को विषय बदलने और बीवॉक के लिए दूसरे कॉलेज में जाने को माइग्रेशन सुविधा दी जाएगी।
सोमवार को शिमला के होटल ट्रिपल एच में उच्च शिक्षा विभाग, कौशल विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में कॉलेज प्रिंसिपलों के लिए जागरूकता कार्यशाला हुई। इसकी अध्यक्षता उच्च शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी ने की। कौशल विकास निगम के प्रबंध निदेशक राजेश शर्मा, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. बीएल बिंटा आदि मौजूद रहे। डा. बीएल बिंटा ने बताया कि सिलेबस को मंजूरी की अधिसूचना मिलते ही प्रशिक्षकों की भर्ती शुरू कर दी जाएगी।
इन कॉलेजों में होगी डिग्री
बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, नादौन, धर्मशाला, ढलियारा, पालमपुर, कुल्लू, मंडी, जोगिंद्रनगर, सरकाघाट, एक्सीलेंस कॉलेज संजौली, रामपुर, सोलन, नाहन और ऊना डिग्री कॉलेज में वोकेशनल डिग्री शुरू होगी। एक विषय में अधिकतम 40 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा।
एक साल में दो सेमेस्टर होंगे। तीन साल की डिग्री में छह सेमेस्टर होंगे। अगर कोई एक साल की पढ़ाई ही करता है तो उसे डिप्लोमा दिया जाएगा। दो साल पढ़ाई करने वालों को एडवांस डिप्लोमा और तीन साल की पढ़ाई करने वालों को डिग्री दी जाएगी।
प्रतियोगी परीक्षाएं देने को पात्र होगी डिग्री
बीवॉक करने वाले स्टूडेंट्स भी बीए, बीएससी और बीकॉम करने वालों की तरह प्रतियोगी परीक्षाएं देने के लिए पात्र होंगे। बीवॉक वाले स्टूडेंट्स भी केंद्र, राज्य पब्लिक सर्विस कमीशन, स्टाफ सेलेक्शन कमीशन सहित इस तरह की अन्य संस्थाओं की परीक्षाएं दे सकेंगे।
कौशल विकास में मिलेगी मदद
वर्तमान शिक्षा प्रणाली से बेरोजगारों की भारी फौज तैयार हो रही है। ऐसे में सरकार ने विद्यार्थियों के लिए रोजगार प्राप्त करने में आसानी देने वाली डिग्री शुरू करने की पहल की है। वोकेशनल डिग्री के तहत छात्रों का कौशल विकास होगा।
अगले सत्र से डिग्री शुरू करने की वकालत
कार्यशाला में कई कॉलेजों के प्रतिनिधियों ने इस सत्र से बीवॉक शुरू करने में असमर्थता जताई। भवनों की कमी का तर्क दिया। कहा-अभी डिग्री शुरू करना जल्दबाजी होगा। पहले पूरी तैयारियां करनी चाहिए। फिर प्रवेश प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। हालांकि, विभाग के अफसरों के पर कॉलेज प्रतिनिधियों ने इसी सत्र से बीवॉक शुरू करने पर सहमति जताई।