अब लोक प्रशासन में नेट पास भी राजनीतिक विज्ञान का सहायक आचार्य बन सकेगा। यूजीसी की ओर से 4 जुलाई को जारी अधिसूचना में लोक प्रशासन और राजनीति विज्ञान में एमए और नेट पास को सहायक आचार्य पद के लिए पात्र माने जाने पर स्थिति साफ की गई है।
अधिसूचना में साफ किया है कि दोनों विषयों को इंटरचेंजेज किया जा सकता है। यूजीसी ने कहा है कि यह संबंधित उच्च अध्ययन संस्थान के विशेषज्ञों या नियुक्ति कर्ताओं की जरूरत पर निर्भर करेगा।
प्रदेश विश्वविद्यालय में लोक प्रशासन और राजनीति विज्ञान के दो अलग-अलग विभाग है। कॉलेजों में भी दोनों विषयों को अलग विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। स्कूल स्तर में 11वीं और 12वीं में पूर्व में शिक्षा विभाग की ओर से गठित तेगटा कमेटी की सिफारिशों पर लोक प्रशासन को डाइंग कैडर बना दिया गया था।
इस कारण स्कूलाें में न के बराबर ही पढ़ाया जाने लगा। इसी वजह से कॉलेजों में भी लोक प्रशासन विषय पढ़ने वाले छात्रों की संख्या कम होती गई। विश्वविद्यालय में 1985 से पूर्व देश के अन्य बड़े विश्वविद्यालयों की तरह से लोक प्रशासन और राजनीति विज्ञान एक ही विभाग में पढ़ाया जाता था।
1985 के बाद दो अलग विभाग बने, इनके अपने बोर्ड आफ स्टडीज और आरडीसी कमेटी बनी। तब से दोनों को कॉलेज स्तर पर अलग अलग विषय के रूप में पढ़ाया जाने लगा था।
यूजीसी का यह फैसला यदि प्रदेश में लागू हुआ तो कॉलेजों में एक बार फिर से लोक प्रशासन एक विषय के रूप में पढ़ाया जाने लगेगा। इससे इस विषय में पहले से नेट पास कर बैठे लोगों को राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन में सहायक आचार्य बनने का मौका मिलेगा।