हिमाचल में लगातार बढ़ रहे कोरोना मामलों के बीच यूजी अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं सुरक्षित तरीके से करवाना एक बड़ी चुनौती है। भले ही परीक्षाएं करवाने के लिए प्रदेश सरकार ने पहल की है, लेकिन कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच किसी भी स्तर पर हुई चूक सभी तैयारियों पर पानी फेर सकती है।
केंद्र की ओर से परीक्षा करवाने को जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को कॉलेज अपने सीमित संसाधनों के बावजूद फॉलो करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे परीक्षा केंद्र सुरक्षित हो सकते हैं, मगर इनमें परीक्षा देने के लिए न्यूनतम 35 किलोमीटर का सफर कर आने वाले विद्यार्थी रास्ते में कहीं भी संक्रमित हो सकते हैं।
इस बैच के करीब 37000 विद्यार्थी परीक्षा देंगे। सरकार ने परीक्षार्थियों के लिए अतिरिक्त बसें संचालित करने को अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। प्रदेश भर में इन परीक्षाओं के लिए सभी कॉलेजों में परीक्षा केंद्र नहीं हैं। 134 परीक्षा केंद्रों में ही परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। जिले के बड़े कॉलेजों में जुटने वाली परीक्षार्थियों की भीड़ के लिए मौजूदा समय में चल रहीं बसें कम पड़ सकती हैं। इन हालात में छात्र के कहीं भी संक्रमित होने की संभावना बनी रहेगी। संक्रमण का एक भी मामला आने पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
दूरदराज क्षेत्रों में विद्यार्थियों की सुरक्षा भी जरूरी
प्रदेश के दर्जनों ऐसे नए कॉलेज हैं, जहां छात्रों की कम संख्या के कारण परीक्षा केंद्र नहीं बने हैं। इन कॉलेजों के परीक्षार्थियों को लंबा सफर तय कर परीक्षा देने जाना पड़ेगा। इनमें छात्राएं भी होंगी। परिवहन की पर्याप्त सुविधा न होने से खास तौर पर शाम के पांच बजे तक के सत्र के बाद कैसे छात्राएं घर पहुंचेंगी।
परीक्षाएं करवाने की जिद छोड़े सरकार-विभाग : एसएफआई
शिमला। एसएफआई के राज्य सचिव अमित ठाकुर ने सरकार और शिक्षा विभाग से कोरोना काल में परीक्षा करवाने का जोखिम न लेने की सलाह दी है। कहा कि परीक्षा के लिए बनाई कार्ययोजना में कही जिक्र नहीं है कि कैसे छात्र सुरक्षित परीक्षा केंद्र पहुंचेंगे। सरकार परीक्षाएं करवाने से पहले प्रदेश के 37000 विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त बसें चलाए। ये बसें आठ सितंबर तक चलाई जाएं।