मान्यता नहीं मिली तो फीस के रूप में लाखों की आय देने वाले इक्डोल का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा, विवि की आय घट जाने के साथ ही इससे यूजी और पीजी डिग्री कोर्स करने के इच्छुक छात्र कहीं प्रवेश नहीं ले पाएंगे।
इक्डोल निदेशक प्रो. कुलवंत पठानिया ने माना कि न्यायालय के आदेशों पर विवि के दो अधिकारियों ने इक्डोल को नए सत्र को मान्यता दिए जाने को हर औपचारिकता पूरी कर ली है, इसके लिए सभी दस्तावेज भी जमा करवा दिए हैं। यूजीसी से मान्यता दिए जाने को लेकर पक्ष में जवाब आने की उम्मीद है।