साथ ही तीन और मामले जुड़ गए थे। इसमें राजेश कुमार, चंद्रमोहन नेगी और शिखा कुशल कुमारी ने भी याचिका दायर की थी। 9 दिसंबर, 2014 को हाईकोर्ट से इन अध्यापकों के पक्ष में फैसला आया था। 18 दिसंबर, 2014 को पैरा अध्यापकों को नियमित करने की अधिसूचना जारी हुई।
पीटीए को अनुबंध पर लाया गया। इसके बाद पंकज कुमार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए जनवरी 2015 में सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पैरा टीचरों में राममूर्ति शर्मा और पीटीए अध्यापकों में विवेक मेहता ने सुप्रीमकोर्ट में पहले ही कैविट दायर कर दी थी।
22 जनवरी, 2015 को सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीश विक्रमजीत सेन और न्यायाधीश सी नागाप्न की डबल बेंच ने इस मामले में कैविट के आधार पर हिमाचल सरकार को यथास्थिति के आदेश दिए थे। 13 फरवरी, 2015 को पंकज कुमार व अन्य तीन के केस को सिविल अपील में तबदील कर दिया था।
साथ ही अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा था कि भविष्य में हिमाचल सरकार सभी को नौकरी के समान अवसर के आधार पर नियुक्तियां करे।प्रदेश पीटीए शिक्षक संघर्ष मंच के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष दिनेश पटियाल ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट में पीटीए अध्यापकों की सेवाओं के खिलाफ पंकज कुमार बनाम हिमाचल सरकार मामला वापस लेने से यह केस अब अधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया है।
याचिकाकर्ता पंकज कुमार द्वारा पीटीए अध्यापकों की सेवाओं को चुनौती देने के मामले को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से शिक्षकों को जल्द नियमित करने की मांग की है। संघर्ष मंच ने उम्मीद जताते हुए कहा कि अब कानूनन कोई भी बाधा इस वर्ग के खिलाफ नहीं है।