प्रदेश में कई दो वर्षीय बीएड कोर्स करके 20 हजार रुपये में अध्यापक बन जाएंगे, तो कईयों को अध्यापक बनने के लिए ढाई लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे। प्रदेश के निजी बीएड कॉलेज मैनेजमेंट सीट मुंह बोली फीस पर दी जा रही है। निजी कॉलेज एक मैनेजमेंट सीट की ढाई लाख रुपये तक की फीस वसूल रहे हैं।
वहीं, इक्डोल में इस बार दाखिले न होने के कारण भी निजी कॉलेज मैनेजमेंट सीट की अधिक फीस वसूल रहे हैं। डेढ़ लाख रुपये से नीचे कोई भी निजी कॉलेज मैनेजमेंट सीट नहीं दे रहा है, जिसके कारण अब छात्रों को मजबूरी में दाखिला लेना पड़ा रहा है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रबंधन भी इस भारी फीस पर लगाम लगाने में पूरी तरह नाकाम है, क्योंकि निजी बीएड कॉलेजों की मैनेजमेंट फीस उसके दायरे में निर्धारित नहीं करता है। उधर, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि फीस हाईकोर्ट ने जो कमेटी गठित की है, वह तय करती है।
मैनेजमेंट सीट की फीस के एक समान नहीं होती है, कई कॉलेज इन सीटों को छात्रों को फ्री तक दे देते हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और बीएड कॉलेज धर्मशाला में बीएड करने की फीस 9300 से साढे 10 हजार रुपये तक है। वहीं, निजी कॉलेज में दो साल की फीस लगभग 90 हजार रुपये होती है।