एसएफआई की राज्य कमेटी ने नर्सिंग छात्राओं की मांगों को लेकर सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रतिनिधिमंडल नर्सिंग छात्राओं के साथ प्रदेश स्वास्थ्य शिक्षा सचिव से भी मिला और मांगों को सामने रखा। हॉस्टल, मिसलेनियस चार्ज के नाम पर फीस वसूली बंद करने सहित अन्य मांगों को उठाया गया। कोरोना काल में छात्रावास बंद थे। बावजूद 70 हजार के करीब हॉस्टल, मेस और परिवहन के नाम पर फीस ली जा रही है। राज्य सचिव अमित ठाकुर ने नर्सिंग छात्राओं को प्रमोट करने करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 32 के करीब निजी और सरकारी नर्सिंग कॉलेज चल रहे हैं और इनमें 6500 के प्रशिक्षु अध्ययनरत हैं। प्रदेश सरकार और विवि प्रशासन की ओर से अभी तक नर्सिंग की छात्राओं को प्रमोट नहीं किया जा रहा है। इससे छात्राएं मानसिक रूप से परेशान हो रही हैं। नर्सिंग में वर्ष भर की प्रैक्टिकल फाइल को बिना प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के एक सप्ताह में बनाने के लिए छात्राओं पर दबाव बनाया जा रहा है। संगठन ने साफ किया कि यदि सरकार ने 15 नवंबर तक मांगों पर अमल नहीं किया तो आंदोलन होगा। 20 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास पर विरोध प्रदर्शन होगा।