ऐसे मामलों में महाविद्यालयों में खाली सीटें होने पर ओपन राउंड के जरिये दाखिले होते हैं। इसमें पहले बारहवीं में 55 और 50 फीसदी अंकों की अनिवार्यता थी। लेकिन अब शीघ्र ही इसमें बड़ा बदलाव किया जा रहा है।
विवि प्रशासन बोर्ड ऑफ गवर्निंग और एकेडमिक काउंसिल की बैठक में अंकों की प्रतिशतता घटाने पर विचार करने वाला है, जिसके लिए पूरा मसौदा तैयार कर लिया गया है।
ताकि निजी महाविद्यालय के प्रबंधकों और तकनीकी विवि को नुकसान न उठाना पड़े। जाहिर है कि जब दाखिले कम होंगे तो इसका सीधा असर कालेज प्रबंधन के साथ विवि पर भी पड़ेेगा। चंकि प्रदेश तकनीकी विवि सेल्फ फाइनांस के तहत चल रही है।
उधर, हिप्र तकनीकी विवि के कुलसचिव डॉ. विक्रम महाजन ने कहा कि हिमाचल के बाहर के महाविद्यालयों में 45 व 40 फीसदी अंकों पर भी दाखिले मिले जाते हैं।
इसके चलते सूबे के अधिकतर महाविद्यालयों में सीटें खाली रह जाती हैं। लेकिन इस बार तकनीकी विवि भी अंकों की प्रतिशतता को घटाने पर विचार करेगी। इस मामले को प्रदेश सरकार के समक्ष भी उठाया जाएगा।