रेगुलर और दूरवर्ती मोड से प्राप्त डिग्री की मान्यता में फर्क रहने से दूरवर्ती मोड से शिक्षा प्राप्त छात्रों के साथ अन्याय न हो, इसके लिए दोनों मोड से प्राप्त डिग्री को एक समान मान्यता दी गई है।
यूजीसी की ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग रेगुलेशन -2017 में पहले ही साफ किया है कि इंजीनियरिंग, मेडिसिन, डेंटल, फार्मेसी नर्सिंग, आर्किटेक्चर, साइकोथैरेपी जैसे कोर्स जिसमें हेंड ऑन ट्रेनिंग जरूरी होती है, उन्हें दूरवर्ती मोड से नहीं पढ़ाया जा सकता है।
इक्डोल के निदेशक प्रो. पीके वेद ने माना कि 23 फरवरी को यूजीसी ने दोनों मोड से प्राप्त डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स को समकक्ष आंकने की अधिसूचना जारी की है।
अधिसूचना जारी होने के बाद इक्डोल से अब तक डिग्री, डिप्लोमा प्राप्त और वर्तमान में अध्ययनरत हजारों छात्र-छात्राओं को इसका लाभ होगा। वे किसी भी सरकारी और गैर सरकारी, निजी संस्थाओं में इक्डोल से प्राप्त डिग्री के आधार पर नौकरी और आगे की पढ़ाई के लिए प्रवेश लेने के लिए पात्रता शर्त पूरी करेंगे।
उनका कहना है कि दूरवर्ती मोड को आम तौर पर दूसरे दर्जे की डिग्री माना जाता था, मगर अधिसूचना जारी होने के बाद छात्र भी हर प्रतियोगी परीक्षा के लिए इक्डोल की डिग्री के आधार पर आवेदन कर सकेंगे।