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एक क्लिक पर विद्यार्थियों के सामने खुल जाएगी पठन सामग्री

Sat, 28 Sep 2019 01:10 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
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विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हजारों शोधार्थियों और आम छात्रों को मुफ्त में ई- रिसोर्स सुविधा देने की तैयारी कर रहा है। विवि की इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल की इस पहल के तहत इस दिशा में दो ई रिसोर्स सुविधा देने वाली कंपनियों की प्रेजेंटेशन भी करवाई जा चुकी है। जो छात्रों को एक लागइन आईडी देगी, जिससे छात्र कहीं भी बैठ कर मोबाइल, कंप्यूटर लैपटॉप के माध्यम से करीब 85 हजार जरनल, डेढ़ लाख से अधिक शोध से संबंधित किताबों को आनलाइन देख सकेंगे और अपनी इच्छा के मुताबिक किसी भी शोध विषय से संबंधित जानकारी डाउनलोड तक कर सकेंगे।

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छात्रों को यह सुविधा प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय और आईक्यूएसी इन कंपनियों में जिनकी सेवाएं उपयुक्त और बेहतर पाई जाएगी, उसके साथ बाकायदा करार करेगा। इसके बाद छात्रों शिक्षकों को मिलाकर पांच हजार उपयोगकर्ताओं को कंपनी लाग इन आईडी और पास्वर्ड देगी, जिससे वे आनलाइन उपलब्ध शोध संबंधित आर्टिकल और पुस्तकों, जरनल को देख व जरूरत के हिसाब से सामग्री डाउनलोड कर सकेंगे। विश्वविद्यालय के आईक्ूयएसी के निदेशक प्रो. चंद्र मोहन परशिरा ने माना कि कंपनियों की डेमोस्ट्रेशन की प्रक्रिया सेल के सदस्यों के समक्ष हो चुकी है।

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इनमें निंबस और इंडिया साइटेशन कंपनी ने प्रेजेंटेशन दी है। इन दोनों कंपनियों से विवि के करीब ढाई सौ शिक्षकों को ट्रायल के तौर पर इस ई-रिसोर्स सॉफ्टवेयर को एक माह तक प्रयोग करने को लिंक देने को कहा गया है। एक माह बात यही कंपनियां बताएंगी कि उनके सॉफ्टवेयर का कितने लोगों ने कितना समय प्रयोग किया, किस तरह के विषय सर्च किए गए, उन्हें जानकारी उपलब्ध हुई या नहीं। इसी के आधार पर सेल और विवि प्रशासन किसी एक कंपनी को चुनकर उसके साथ इस सुविधा को छात्रों को देने का करार करेगा। 

2.80 हजार तक की राशि और सालाना दस फीसदी राशि खर्च कर मिल जाएगी सुविधा 
आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. चंद्र मोहन परशिरा ने बताया कि इन दोनों कंपनियों की सेवाएं पसंद आने पर ही करार के बारे आगे बात बढ़ेगी। जिसमें करीब करीब 2.80 लाख की एकमुश्त राशि विवि देगा, वहीं सालाना दस फीसदी देना होगा, जो 28 हजार के करीब पड़ेगा। जिससे विवि के करीब 5000 छात्र, शिक्षक ई रिसोर्स का इस्तेमाल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि विवि में इससे शोध कार्य कर रहे शिक्षकों, शोधार्थियों के साथ आम छात्रों को लाभ मिलेगा, वे ऑनलाइन लाखों आर्टिकल और किताबों को देख सकेंगे और सामग्री डाउनलोड कर सकेंगे।
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