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अनुपूरक परीक्षाओं में परीक्षा केंद्र नहीं मिलने पर भड़के विद्यार्थी

Mon, 23 Sep 2019 12:25 PM IST
अरविन्द ठाकुर प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर
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सांकेतिक तस्वीर
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से अक्तूबर में करवाई जा रहीं अनुपूरक परीक्षाओं के परीक्षा केंद्रों को लेकर विद्यार्थियों ने सवाल उठाए हैं। प्रदेश में वर्तमान में 135 से अधिक कॉलेज हैं। लेकिन विवि प्रशासन ने अनुपूरक परीक्षाओं के लिए केवल 51 महाविद्यालयों की सूची जारी की है। ऐसे में कई छात्र-छात्राओं को 35 से 40 किलोमीटर का सफर तय कर अनुपूरक परीक्षा देने के लिए दूसरे महाविद्यालय में जाना पड़ेगा।

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विद्यार्थियों में अरुण कुमार, सुरेश शर्मा, प्रदीप ठाकुर और रोहित ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर परीक्षा केंद्र 35 से 40 किलोमीटर दूर स्थापित करने हैं तो प्रदेश में करीब डेढ़ सौ महाविद्यालयों को खोलने का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि अक्तूबर माह में रूसा के तहत चल रहे पांचवें सेमेस्टर की परीक्षाएं हैं।

विवि प्रशासन चाहे तो इन परीक्षाओं के साथ ही अनुपूरक परीक्षाओं का आयोजन हो सकता है। उन्होंने पूछा है कि अगर सेमेस्टर सिस्टम और वार्षिक परीक्षाएं प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में हो सकती हैं तो अनुपूरक परीक्षाएं क्यों नहीं? बता दें कि प्रदेश सरकार ने बीते वर्ष रूसा के तहत चल रही सेमेस्टर सिस्टम परीक्षाओं को खत्म करते हुए वार्षिक परीक्षाओं का निर्णय लिया था।

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वर्तमान में पहले और दूसरे वर्ष के विद्यार्थियों को वार्षिक परीक्षा प्रणाली, जबकि तीसरे, चौथे, पांचवें और छठे सेमेस्टर के विद्यार्थियों को सेमेस्टर सिस्टम के तहत परीक्षाएं देनी पड़ रही हैं। वहीं विवि प्रशासन का तक है कि बीते लंबे समय से अनुपूरक परीक्षाओं के लिए कम परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं। चूंकि एक परीक्षा केंद्र पर विवि के करीब 2 से 2.50 लाख रुपये खर्च होते हैं।

सालों से कम ही बनाए जाते हैं परीक्षा केंद्र
हिमाचल प्रदेश विवि के कुलपति डॉ. सिकंदर कुमार का कहना है कि अनुपूरक परीक्षाओं के लिए कई सालों से कम ही परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं। चूंकि अनुपूरक परीक्षाएं देने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम होती है। परीक्षा केंद्र अधिक होने के चलते विवि का खर्च बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में कई महाविद्यालयों से पत्र मिले थे। तीन दिन पूर्व ही विवि की परीक्षा नियंत्रण शाखा और अन्य सभी अधिकारियों से विवि का परीक्षाओं के संचालन पर होने वाला खर्च और अनुपूरक परीक्षाओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या पर चर्चा के बाद यह निर्णय लिया है।
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