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लॉगइन आईडी पर ही जारी होगा पीजी प्रथम सेमेस्टर का रोलनंबर

Sun, 14 Oct 2018 12:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल  प्रदेश विश्वविद्यालय के पीजी कोर्स को पूरी तरह से ऑनलाइन बनाने की शुरुआत हो गई है। इसमें पीजी कोर्स के सभी रेगुलर और प्राइवेट मोड से कोर्स करने वाले प्रथम सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन एग्जाम पोर्टल के माध्यम से अपना लॉगइन और आईडी क्रिएट करना अनिवार्य किया गया है। 

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परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी ने साफ किया कि सभी पीजी कोर्स प्रथम सेमेस्टर की नवंबर माह से शुरू होने वाली परीक्षा में अपीयर होने वाले छात्र-छात्राओं को अपना लॉगइन आईडी क्रिएट करना ही होगा। उसके बाद ही उन्हें ऑनलाइन परीक्षा रोलनंबर जारी किए जाएंगे। जिन छात्रों ने अपने लॉगइन आईडी बनाकर एग्जाम पोर्टल में अपना लॉगइन क्रिएट नहीं किया है, वे 18 अक्तूबर तक हर हाल में इसे क्रिएट कर लें।

परीक्षा फॉर्म भरने के लिए ही विवि ने अंतिम तिथि बढ़ाई है। इसके बाद सिर्फ फॉर्म में करेक्शन करने के लिए आवश्यकता होने पर समय सीमा बढ़ाई जा सकती है, मगर अकाउंट बनाने के लिए 18 अक्तूबर तक का ही समय दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रथम सेमेस्टर के हजारों छात्र छात्राओं ने बिना आईडी और लागइन क्रिएट किए ही ऑफलाइन परीक्षा फार्म भरे हैं। उनको अलग से लागइन क्रिएट करना अनिवार्य किया गया है। 
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ऑफलाइन फीस भरने वालों को दोबारा नहीं भरनी होगी
परीक्षा नियंत्रक ने माना कि करीब छह हजार ऐसे विद्यार्थी पाए गए हैं, जिनके परीक्षा फॉर्म आनलाइन नहीं भरे गए हैं। उन्हें विवि के एग्जाम पोर्टल से अपना अकाउंट लागइन आईडी बनाकर आवश्यक सूचना दर्ज करनी होगी। जिन परीक्षार्थियों ने पहले ही ऑफलाइन परीक्षा फार्म भर डिमांड ड्राफ्ट, चेक या आईपीओ से फीस जमा की है, उनसे दोबारा फीस नहीं ली जाएगी। उन्हें ऑनलाइन फॉर्म में दी गई फीस आलरेडी पेड के आप्शन पर चुनकर ब्योरा देना होगा। 

पीएचडी फीस बढ़ोतरी मामले पर बनाई 5 सदस्यीय कमेटी 
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से पीएचडी छात्रों की फीस बढ़ोतरी मामले को लेकर डीएस प्रो. अरविंद कालिया की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। ईसी में लिए गए फैसले के बाद बढ़ाई गई फीस को तर्कसंगत बनाए जाने के बाद यह कमेटी बनाई गई है। कमेटी में कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, वित्त अधिकारी, डीएसडब्लू को सदस्य बनाया गया है।

अधिकारियों की यह कमेटी सभी तथ्यों और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा कर कुलपति को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद मामला विवि ईसी में ले जाया जाएगा। वहीं पर रिपोर्ट की सिफारिशों के मुताबिक फीस कम करने या इसे जारी रखने पर निर्णय लिया जाएगा। गौतलब है कि पीएचडी छात्र प्रतिमाह आठ सौ रुपये की फीस को बहुत अधिक बताकर इसे कम करने की मांग उठाते रहे हैं।

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