एचपीयू के दर्जनों छात्रों को 2016 से छात्रवृत्ति नहीं मिली है। एससी और एसटी श्रेणी के छात्रों को छात्रवृत्ति के लिए तरसना पड़ रहा है। ऐसे दर्जनों छात्र हैं, जिन्हें अब तक वित्तीय लाभ नहीं मिल पाया है। छात्रवृत्ति को जारी करवाने के लिए विद्यार्थी लगातार शिक्षा निदेशालय के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं।
इससे इस श्रेणी के गरीब और असहाय छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनजातीय क्षेत्र के छात्र जो विश्वविद्यालय में ठहरने और खाने पीने की व्यवस्था भी अपने स्तर पर करते हैं। छात्रों को सरकार की ओर से पीजी और इससे आगे की पढ़ाई करने के लिए यह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। यह दस हजार रुपये तक रहती है।
जनजातीय क्षेत्र और अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों का कहना है कि कई बार छात्रवृत्ति को लेकर निदेशालय और विवि के अधिकारियों से बात कर चुके हैं, लेकिन अभी तक छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है। इन दोनों श्रेणी से संबद्ध रखने वाले छात्रों ठाकुर सिंह (मंडी ) एमफिल इकोनोमिक्स, शालू (बिलासपुर ) एमफिल इकोनोमिक्स, पंकज कुमार एमबीए तृतीय सेमेस्टर सत्र 2016-17, दीप कुमार (शिमला)
एमफिल कॉमर्स, प्रदीप कुमार (शिमला) एमए इंग्लिश, सोम चंद (शिमला) एमए समाजशास्त्र, सत्र 2016-17, प्रेम (चंबा) एमफिल इतिहास सहित कई छात्र हैं, जिन्हें अब तक छात्रवृत्ति नहीं मिली है। छात्रों ने शिक्षा निदेशालय से मांग उठाई है कि छात्रवृत्ति जल्द से जल्द उनके खाते में डाली जाए।
इधर, शिक्षा विभाग की संयुक्त निदेशक उमा वर्मा ने माना की छात्रों की ओर से ऑनलाइन भरे गए गलत ब्यौरे और समय से पोर्टल के खुला रहने पर आवेदन न किए जाने जैसे कई कारणों से छात्रवृत्ति जारी नहीं हुई है।
जिन छात्रों की छात्रवृत्ति नहीं मिली है, वे पुन: निदेशालय की संबंधित शाखा में नाम, श्रेणी, डिग्री, आधार नंबर के अलावा जो भी आवश्यक जानकारी जरूरी होती है, पूरा ब्यौरा लिखकर पुन: आवेदन करें।