हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संबद्ध निजी और सरकारी कॉलेजों में बुधवार से बीएड और एमएड की परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। इसके लिए विवि ने प्रदेशभर में 54 परीक्षा केंद्र बनाए हैं।
इनमें बीएड के करीब 6500 और एमएड के 44 परीक्षार्थी परीक्षा देने बैठेंगे। विश्वविद्यालय ने सेंटरलाइज्ड काउंसलिंग के बिना एमएड में अपने स्तर पर दिए प्रवेश पर करीब तीन दर्जन परीक्षार्थियों के रोलनंबर रोक दिए हैं। इन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं होगी।
इस पर निजी शिक्षा संस्थान कोर्ट गए हैं, जिसकी बुधवार को ही पहली सुनवाई होनी है। कोर्ट ही इन परीक्षार्थियों को परीक्षा में बैठने या न बैठने पर अपना फैसला देगा। उसके बाद ही विवि इन परीक्षार्थियों को परीक्षा में बैठने देगा।
एमसीए कोर्स की तरह से एमएड में भी निजी कॉलेजों ने अपने स्तर पर एमएड में प्रवेश दिया है। इस पर विवि ने करीब तीन दर्जन छात्रों के रोलनंबर जारी नहीं किए हैं और उनकी परीक्षा के लिए बंदोबस्त भी नहीं किया है। कोर्ट के आदेश आने पर ही इन छात्रों को परीक्षा देने का मौका मिल पाएगा।
विवि के निर्णय के खिलाफ कोर्ट गए निजी कॉलेज
एमएड कोर्स के दर्जनों परीक्षार्थियों के रोलनंबर न जारी किए जाने और परीक्षा में बैठने की अनुमति न दिए जाने को लेकर कोर्ट गए हैं। उन्होंने न्यायालय से इन छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दिए जाने की मांग उठाई है। इस पर न्यायालय आज फैसला दे तो परीक्षार्थियों को राहत मिल सकती है।
एमसीए में प्रवेश पर पहले से चल रहा विवाद
विश्वविद्यालय से संबद्ध कांगड़ा के एक निजी कॉलेज में भी बिना सेंटरलाइज्ड काउंसलिंग के एमसीए में दिए गए प्रवेश के मामले पर बवाल मचा है।
एसएफआई के विरोध के चलते उक्त निजी कॉलेज को विवि ने नोटिस जारी किया है। इसका जवाब 30 दिसंबर तक आने की उम्मीद है, उसके बाद मामले पर कुलपति के वादे के मुताबिक जांच बिठाई जानी है।
विवि के परीक्षा नियंत्रक डा. जेएस नेगी ने माना कि निजी कॉलेजों में अध्ययनरत करीब तीन दर्जन एमएड छात्रों के रोलनंबर रोके गए हैं।
एचपीयू के शिक्षा विभागाध्यक्ष ने सिर्फ 44 छात्रों के रोलनंबर ही अप्रूव किए हैं, वहीं निजी कॉलेजों में बिना सेंटरलाइज्ड काउंसलिंग के प्रवेश लेने वाले छात्रों के रोलनंबर जारी करने के मामले में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा है।